जेल में भ्रष्टाचार, बिना पैसे नहीं होता कोई काम
बिजनौर। जिला कारागार से जमानत पर आए एक बंदी ने जेल प्रशासन पर उत्पीड़न करने के साथ जेल में भ्रष्टाचार फैलने का आरोप लगाया हैं। उसने कहा कि बिना पैसा दिए वहां कोई काम नहीं होता है। मानवाधिकार आयोग ये शिकायत करके इस मामले में जांच कराकर कार्रवाई की मांग की है।
चांदपुर के मोहल्ला शाहचंदन निवासी महबूब ने मानवाधिकार आयोग से शिकायत की है कि उसे एक जून 2018 को जान लेवा हमले के फर्जी मामले में जेल भेजा गया था। जेल में उससे मुलाकात करने गए भाई ने बताया कि जेल में काम नहीं करने के नाम पर तीन हजार रुपये तक वसूले जाते हैं। नाश्ते के नाम पर दस ग्राम चना, थोड़ा गुड़, पतली चाय व दलिया दिया जाता है। कैंटीन से दस रुपये की चाय दी जाती है। 70 रुपये लीटर दूध और 80 रुपये किलो चीनी बेची जाती हैं। बिस्कुट व अन्य सभी सामान महंगा बेचा जाता हैं। सब्जी तक मंहगी दी जा रही है। जेल में आने वाले अधिकारियों से भी उसने शिकायत की पर कुछ नहीं हुआ।
स्वास्थ्य खराब होने पर उसने न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया। चिकित्सक ने अल्ट्रासाउंड के बाद उसके आपरेशन की सलाह दी थी। उसे जेल प्रशासन ने मेरठ मेडिकल में नहीं भेजा। जेल के कर्मचारियों ने जेल प्रशासन से मिलने की गुहार लगाने पर उसे गाली दी। बंदी से 20 हजार रुपये मांगे। 15 दिसंबर को उसकी रिहाई का परवाना पहुंचा। इसके बाद भी उसके साथ जेल के अधिकारियों ने गाली गलौज की। कहा कि उनकी शिकयत की तो झूठे मामले में फंसाकर फिर से जेल भिजवा देंगे। शिकायत में कहा कि जेल में बंदी काल में उसका शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न किया गया। जेल में बिना पैसे के कोई काम नहीं हो रहा। उससे जेल के अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराकर कार्रवाई करने की मांग की है।
महबूब की दस दिन पूर्व जमानत हुई है। वह कई बार न्यायालय व अधिकारियों से झूठी शिकायत करता रहा है। महबूब जो आरोप लगा रहा है वह सरासर गलत हैं - शैलेंद्र प्रताप सिंह, जेलर, जिला कारागार बिजनौर।