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कोरोना ने धीमी की गेहूं खरीद की रफ्तार

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कोरोना ने धीमी की गेहूं खरीद की रफ्तार
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बिजनौर। कोरोना महामारी के चलते गेहूं की खरीदारी धीमी गति से हो रही है। तमाम किसानों के गेहूं की गहाई चल रही है। उनका गेहूं घर नहीं पहुंचा है। यही वजह है कि 29 दिन के भीतर तीन हजार 815 मीट्रिक टन गेहूं की ही खरीदारी हो पाई है। किसानों को किसी भी केंद्र पर गेहूं बेचने के लिए स्वतंत्र कर दिया गया है।
जिले में गेहूं खरीद के लिए 48 खरीद केंद्र से बनाए गए हैं। एक अप्रैल से गेहूं की खरीदारी हो रही है। कोरोना महामारी के चलते गेहूं की खरीदारी पर भी संकट खड़ा हो गया है। गेहूं खरीद केंद्रों पर तैनात कर्मचारियों को भी डर है कि कहीं वे कोरोना की चपेट में न आ जाएं। जिन किसानों का गेहूं घर पहुंच गया है वे भी गेहूं बेचने से अभी बच ही रहे हैं। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की वजह से गहाई लेट हो गई है। इस वजह से अब तक करीब 20 प्रतिशत गेहूं अब भी खेतों में खड़ा है। अब तक इन किसानों का गेहूं घर नहीं आया है। कई जगह गेहूं की गहाई चल रही है। यही वजह है कि गेहूं खरीद होने के 29 दिन बाद भी तीन हजार 815 मीट्रिक टन गेहूं ही खरीदा गया है।
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सरकार ने किसानों को किसी भी केंद्र पर गेहूं बेचने के लिए स्वतंत्र कर दिया है। केंद्र का संबद्धीकरण खत्म कर दिया है। ऐसे में किसान अपने नजदीक या मनमर्जी के किसी भी केंद्र पर गेहूं बेच सकता है। इससे किसानों को फायदा होगा। अगर किसी केंद्र पर भीड़ लगती है तो किसान दूसरे केंद्र पर जा सकता है। भाकियू युवा के प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह के अनुसार पिछले साल धान बेचने में किसानों को बहुत परेशानी हुई थी। अगर इस बार किसानों के गेहूं में कमी निकालकर किसान को परेशान किया गया तो आंदोलन किया जाएगा। अफसरों के कार्यालयों में गेहूं भर दिया जाएगा। उधर, जिला खाद्य विपणन अधिकारी घनश्याम वर्मा के मुताबिक पिछले साल 29 दिनों में इस बार के मुकाबले आधी ही खरीदारी हुई थी। इस बार खरीद ज्यादा है। आने वाले दिनों में इसके बढ़ने की उम्मीद है।
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