-दुष्कर्म के आरोपी के रिश्तेदार मां-बेटे को भी अपहरण में दोषी पाकर सुनाई सजा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट कमलदीप ने एक महिला से दुष्कर्म में अरुण कुमार को दोषी पाते हुए 10 साल के कारावास की सजा सुनाई है। वहीं अपहरण में दोषी पाते हुए जगमोहन और उसकी मां रोशन देई को सात-सात साल के कारावास की सजा सुनाई है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता मुकुल कुमार राठौर ने बताया कि थाना मंडावली में एक महिला ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें कहा गया कि जगमोहन और रोशन देई गांव में उसके पड़ोसी हैं। जगमोहन के मौसेरे भाई अरुण कुमार पुत्र रतन सिंह निवासी गांव कोट सराय थाना मंडावर का गांव में आना जाना था। अरुण से उसकी जान पहचान हो गई। इसी दौरान अरुण ने उसके कुछ फोटो अपने मोबाइल में खींच लिए थे। जगमोहन अपने फोन के जरिए अरुण से उसकी जबरन बात कराने लगा। कुछ समय बाद ही उसका रिश्ता रामदासवाली गांव में हो गया। लेकिन अरुण ने फोन करके उसके रिश्ते को तुड़वा दिया। अरुण कहने लगा कि मैं ही तुमसे शादी करूंगा जबकि मैंने विवाह करने से मना कर दिया था। इसी बीच उसका विवाह दूसरी जगह उसकी सहमति से कर दिया गया। 4 सितंबर 2016 को जब वह अपने मायके में थी तभी जगमोहन ने अपने फोन से अरुण से कराई। अरुण ने फोटो वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उसे मंडावली बुला लिया। जहां पर अरुण, जगमोहन और जगमोहन की मां रोशन देई ने एक गाड़ी में बैठाकर मुरादाबाद ले गए। मुरादाबाद में ले जाकर उसके साथ अरुण ने जबरन शारीरिक संबंध बनाए गए। सात सितंबर को वह किसी तरह आरोपियों के चंगुल से निकलकर मुरादाबाद रेलवे स्टेशन पर पहुंची और किसी अन्य व्यक्ति के फोन से अपने पति को फोन किया। पुलिस ने विवेचना करने के बाद अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। अब अदालत ने अरुण, उसके मौसेरे भाई जगमोहन पुत्र प्रवीण सिंह और मौसी रोशन देई पत्नी प्रवीण सिंह को दोषी पाते हुए सजा सुनाई है।