बिजनौर के नगीना में सहकारी कताई मिल की सरप्लस भूमि पर आवास विकास कॉलोनी बनाएगा। इसके लिए लखनऊ से आई आवास विकास योजना एवं उद्योग विभाग की सर्वे टीमों ने मिल की भूमि का निरीक्षण किया।
उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद मुरादाबाद के अधीक्षण अभियंता आरके यादव, उत्तर प्रदेश उद्योग विभाग लखनऊ के सहायक अभियंता एके नीगम, जिला उद्योग विभाग बिजनौर के जोगेंद्र सिंह, अवर अभियंता बिजनौर योगेश कुमार, उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद के एसके शर्मा शुक्रवार दोपहर 12 बजे नगीना सहकारी कताई मिल पहुंचे।
यहां कताई मिल के प्रभारी मदन पाल सिंह के साथ मिल की सरप्लस भूमि का निरीक्षण किया और मिल के बराबर में स्थित कडूला नदी का भी निरीक्षण किया और तकनीकी जानकारी भी प्राप्त की। सर्वे टीम कताई मिल में करीब दो घंटे तक मौजूद रही।
सर्वे टीम के संबंध में कताई मिल के प्रभारी मदनपाल सिंह ने बताया कि आवास विकास विभाग कताई मिल की करीब 100 बीघा सरप्लस भूमि को खरीद कर कॉलोनी बनाना चाहता है।
मिल प्रबंधन इस भूमि के मिलने भुगतान से मिल कर्मचारियों का लगभग पांच करोड़ के बकाया का भुगतान करना चाहता है। इस योजना के लिए नियुक्त किए गए उत्तर प्रदेश आवास विभाग परिषद मुरादाबाद के निर्माण 24 के सहायक एसके शर्मा ने बताया कि नगीना में आवास विकास की कॉलोनी बनाने की योजना है। प्रदेश सरकार के निर्देश पर सरप्लस भूमि का सर्वे कर प्रस्ताव प्रदेश सरकार को भेजा जा रहा है। संस्तुति मिलने के बाद आगे के कार्रवाई शुरू हो जाएगी।
गौरतलब है कि वर्ष 1974 में नगीना सहकारी कताई मिल की स्थापना की गई थी। भारी कमियों के चलते वर्ष 2000 में मिल की पूर्ण तालाबंदी कर दी गई थी। उस समय करीब 15 सौ से अधिक मिल के श्रमिक बेरोजगार हो गए थे। बीच बीच में मिल प्रबंधन द्वारा मिल चलाने की घोषणा भी की गई। क्षेत्रीय विधायकों द्वारा भी मिल को चलवाने का आश्वासन दिया गया लेकिन मिल पुन: नहीं चल सकी। मिल के श्रमिकों का करोड़ों रुपये का भुगतान आज भी शेष है। इस भुगतान को करने के लिए सरकार पर दबाव भी बनाए गए, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। करीब पांच माह पूर्व मिल की सरप्लस भूमि को बेचने का मामला चल रहा था। एसके शर्मा ने बताया कि यह योजना आगामी दो से चार माह में प्रस्ताव पारित होने के बाद शुरू होने की संभावना है।
जिनका कहीं नहीं ठिकाना, उन्हें मिलेगा आशियाना
कालागढ़। वन विभाग को रामगंगा बांध परियोजना की भूमि सौंपने की प्रक्रिया में यहां लंबे समय से काबिज नागरिकों के पुनर्वास की तैयारी प्रशासन ने शुरू कर दी है। नायब तहसीलदार सयन सिंह नेगी ने बताया कि 861 नागरिकों के सर्वे के बाद यह कदम उठाया जा रहा है। उनसे यह शपथ पत्र लिया जा रहा है कि उनके पास पूरे देश मे कहीं भी किसी तरह की संपत्ति तो नहीं है। पात्र नागरिकों को ही इसका लाभ दिया जाएगा। रामगंगा बांध परियोजना की कालोनी में 1960 के दशक से निवास कर रहे नागरिकों के दिन बहुरने की तैयारी प्रशासन कर रहा है। सिंचाई विभाग की कालोनियों में काबिज 861 नागरिकों का सर्वे दो माह पूर्व पौड़ी के डीएम ने कराया था। परियोजना की कालोनियां वन विभाग की जमीन पर 1960 के दशक मे तैयार की गई थीं। तब से यहां निवास कर रहे मजदूर, विभागों से छंटनी वाले कर्मचारी और विभिन्न विभागों के रिटायर्ड कर्मचारियों के परिवार निवास कर रहे हैं।
देश में कहीं भी भूमि और भवन न होने के कारण वह यहां सरकारी निवासों में किसी तरह से सिर छिपाए हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अब वन विभाग को भूमि सौंपी जा रही है आैर जरूरतमंदों का पुनर्वास किया जा रहा है।