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Bijnor News: युद्ध की तपिश से जला कोयला, लोगों की जेब तक लगी आग

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बड़ौत। अमेरिका, इस्त्राइल व ईरान के बीच चल रहे युद्ध से कोयले की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। एक सप्ताह में कोयले के दाम 12 हजार से 18 हजार रुपये टन पर पहुंच गए। इससे बागपत के 400 भट्ठों पर ईंट निर्माण की लागत बढ़ गई और इसका असर ईंटों के दाम पर पड़ने लगा, जो आम लोगों को प्रभावित कर रहा है।
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जिले में 400 भट्ठे संचालित हैं। इन पर ईंट पकाने के लिए फसल अवशेष व लकड़ी के साथ ही कोयला इस्तेमाल होता है। कोयला व्यापारियों के अनुसार गुजरात के कई बिजली संयंत्र समुद्र तट के पास स्थित हैं, इसलिए समुद्री मार्ग से अमेरिकी व इंडोनिशया से समुद्र के रास्ते बड़े जहाजों में एक साथ अधिक मात्रा में कोयला आता है। ऐसे में उत्तर प्रदेश, झारखंड या ओडिशा से रेल के माध्यम से कोयला मंगवाने की तुलना में गुजरात से कोयला मंगवाया जाता है, जो अच्छा होता है और दाम भी कम होते हैं।
इस कोयले की कीमत एक सप्ताह पहले तक 12 हजार रुपये टन थी, जो अब बढ़कर 18 हजार रुपये टन हो गई है। भट्ठा मालिकों के अनुसार एक भट्ठे पर मार्च से जुलाई तक के सीजन में 400 टन तक कोयले की खपत होती है। भट्ठे अभी एक मार्च से शुरू हुए हैं और यह कीमत इतनी रही तो एक भट्ठे पर 24 लाख रुपये तक अधिक खर्च हो सकते हैं। इसका सीधा असर ईंटों के दाम पर पडऩा शुरू हो गया है। ईंट के दाम अभी पांच से साढ़े छह हजार रुपये प्रति एक हजार थे। इनमें पांच सौ रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है।
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भारत में खासकर उत्तर प्रदेश के सोनभद्र क्षेत्र में कोयले के भंडार जरूर हैं, लेकिन वहां का कोयला अधिक राख वाला और कम गुणवत्ता का होता है। अमेरिका और इंडोनेशिया से आने वाला कोयला ज्यादा कैलोरीफिक वेल्यू वाला होता है। गुजरात में बंदरगाहों पर यहां से कोयला आता है और वहां से यहां मंगवाया जाता है, जो अन्य जगहों के मुकाबले सस्ता पड़ता है। अब दाम में एक सप्ताह में काफी बढ़ोतरी हुई है।
-हंस कुमार जैन, कोयला व्यापारी
जिस तरह से कोयले के दाम बढ़ रहे हैं अगर यही स्थिति रही तो आने वाले दिनों में इसका काफी असर दिखाई देगा। जिस तरह से कोयले के दाम बढ़ेंगे, उसी तरह ईंटों के दामों में बढ़ोतरी करनी पड़ेगी।
-पप्पू कलंदर, ईंट भट्ठा मालिक
कोयले की कीमत बढ़ने से ईंट बनाने में लागत ज्यादा आ रही है। ईंट के दाम बढ़ाने पड़ रहे हैं और इससे निर्माण कार्य में लागत ज्यादा आएगी। इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ेगा। मकान निर्माण का खर्च भी बढ़ जाएगा।
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-राजेंद्र प्रधान, ईंट भट्ठा मालिक
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