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कड़ियों वाले आंगनबाड़ी केंद्रों में बचपन हो रहा बड़ा

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बिजनौर के बदहाल आंगनबाड़ी केंद्र में पढ़ते बच्चे। - फोटो : BIJNOR
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कड़ियों वाले आंगनबाड़ी केंद्रों में बचपन हो रहा बड़ा
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बिजनौर। जिले में कच्चे मकानों को पक्का किया जा रहा है और आंगनबाड़ी केंद्रों पर नौनिहाल अब भी कई जगह कड़ियों वाले मकान में बैठने को मजबूर हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों पर हाल यह है कि जिले में आधे से ज्यादा आंगनबाड़ी केंद्रों का किराया भी सरकार नहीं दे रही है।
सरकार के निर्देश पर सोमवार से आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों के लिए खुल गए हैं। हालांकि अभी सोमवार व बृहस्पतिवार को ही बच्चों को बुलाया गया है। जिले में तीन हजार 236 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों पर साढ़े तीन लाख से अधिक बच्चे आते हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों को परिषदीय विद्यालयों में स्थानांतरित किया जा रहा है। तब भी जिले में 397 आंगनबाड़ी केंद्र आज भी किराये के भवनों में चल रहे हैं। किराए के भवनों पर चलने वाले आंगनबाड़ी केंद्रों में से केवल 137 का किराया ही शासन की ओर से भेजा जा रहा है। सरकार के मानकों पर बाकी आंगनबाड़ी केंद्र खुद खरे नहीं उतर रहे हैं। वहां बच्चों के बैठने और खेलने के लिए पर्याप्त जगह तक नहीं है। विभाग भवन किराये पर लेना चाहता है तो तीन हजार रुपये मासिक किराए पर भी आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए कोई अपना घर देने को तैयार नहीं है।
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केंद्रों पर लटका रहता है ताला
सरकार द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों को प्ले स्कूलों में बदलने का प्रयास किय जा रहा है, लेकिन एक कमरे में चलने वाले आंगनबाड़ी केंद्रों में इसके बारे में नहीं सोचा जा सकता है। कई जगह स्कूलों में भी आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताला लटका रहता है और कार्यकर्ता केवल खाद्यान्न बांटने के दिन ही केंद्र खोलती हैं।
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निर्बाध दे रहे योजनाओं का लाभ
जिला कार्यक्रम अधिकारी नागेंद्र मिश्रा के अनुसार मानकों पर खरा न उतरने वाले केंद्रों को बदलने की कोशिश की जा रही है। भवन देखे भी जा रहे हैं। अभी केंद्र खुले हैं। विभाग की सभी योजनाओं का लाभ पात्रों को निर्बाध दिया जा रहा है।
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