मंडावली/नजीबाबाद। स्वयंभू मोटा महादेव सिद्धपीठ प्राचीन मंदिर आस्था और विश्वास का केंद्र है। हरिद्वार से गंगाजल लाकर जलाभिषेक करने वाले शिवभक्तों की मोटा महादेव हर कामना पूरी करते है, तो भैरोनाथ का सोटा शिवभक्तों के शरीर पर लगते ही यात्रा की थकान मिटा देते है और आगे की मंजिल आसान हो जाती है।
नगर से करीब पांच किमी दूर हरिद्वार-काशीपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर प्राचीन काल से मोटा महादेव मंदिर शिवभक्तों की अटूट आस्था केंद्र है। श्रद्धालु प्रत्येक दिन मंदिर पर पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते रहते हैं, सोमवार को शिवभक्त विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। साल भर में श्रावण मास और फाल्गुन मास में शिवभक्त हरिद्वार से गंगाजल लाकर भगवान आशुतोष का जलाभिषेक करते हैं। शिवभक्त कांवड़िये मोटा महादेव का जलाभिषेक करने के लिए कांवड़ में बांधकर या अलग से गंगाजल लाते हैं।
मंदिर के पुजारी पंडित शशिनाथ ने बताते हैं कि सैकड़ों साल पहले यहां शिवलिंग स्वयं प्रकट हुआ। इस लिए शिवधाम को स्वयंभू मोटा महादेव सिद्धपीठ नाम से पुकरा जाता है। उनके पूर्वजों ने श्रद्धालुओं के सहयोग से मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। मान्यता है कि हरिद्वार से गंगाजल लाने वाला यदि कोई शिवभक्त यहां जल चढ़ाए बिना आगे बढ़ जाए तो उनके शिवालय में भगवान गंगाजल स्वीकार नहीं करते हैं। मंदिर परिसर में भैरो बाबा के दर्शन और सोटा लगने से शिवभक्तों के कलमष दूर हो जाते और पहली यात्रा की थकान मिट जाती और आगे की मंजिल आसान हो जाती है। श्रद्धालु मानते है कि मंदिर मौर्य काल से स्थापित है। वर्ष 1780 में मंदिर का जीर्णोंद्धार हुआ था। शिवभक्त शिवरात्रि पर भगवान आशुतोष का जलाभिषेक कर मनोकामना पूर्ण होने का आशीर्वाद लेते हैं।