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Bijnor News: टूटे शेड, क्षतिग्रस्त पंखे, तपती दोपहरी में खुले में खड़े रहते हैं गोवंश

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कादराबाद। गांव अगवानपुर में संचालित वृहद गो संरक्षण में संरक्षित गोवंशों के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं। यहां करीब 533 गोवंश संरक्षित हैं लेकिन न तो पर्याप्त शेड है और न ही बाउंड्री की सही व्यवस्था है। गोवंशों के लिए लगाए गए पंखे भी क्षतिग्रस्त हैं। तपती दोपहर में यहां संरक्षित पशु खुले में खड़े रहने को मजबूर हैं।
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गोशाला में गोवंशों को सुविधाएं नहीं मिल पा रहीं हैं। पशुओं को रोकने के लिए लगाई गई तार-बाड़ जगह-जगह से टूटी हुई है। गोशाला परिसर से गोवंश बाहर निकल जाते हैं, जिन्हें फिर से पकड़कर लाया जाता है। चार पुराने शेड बने हुए हैं। इनकी छत पर डाली गईं सीमेंट चादरें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हैं, जो कभी भी गोवंश व कर्मचारियों के ऊपर गिर सकती हैं।
इसके अलावा टिन शेड में लगाए गए पंखे भी क्षतिग्रस्त हैं। बरसात के दौरान गोशाला में दो से तीन फिट पानी भर जाता है। पंप शेड से पानी की निकासी की जाती है। गोवंश के लिए धूप से बचने का टिन शेड के अतिरिक्त कोई साधन नहीं है। मृत पशुओं को दफनाने की भी कोई उचित व्यवस्था व स्थान नहीं है। गोशाला परिसर में गड्ढा खोदकर मृत पशुओं को दफनाया जाता है।
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सड़ते रहते हैं मृत पशुओं के शव, दुर्गंध से जीना मुहाल : गांव अगवानपुर स्थित गोशाला के आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि जब से गोशाला बनी है, वे बहुत परेशान हैं। महिला सावित्री देवी का कहना है कि गोशाला से उठती दुर्गंध से पूरा परिवार परेशान रहता है। घरों में सूखे गोबर का कचरा व भूसा हवा के साथ उड़कर आता है। जयवंती का कहना है गोशाला में पशुओं के शव पड़े सड़ते रहते हैं। गोशालाकर्मी गड्ढे खोदकर रखते हैं। जब कई शव हो जाते हैं, तब उन्हें दफनाया जाता है।
अजय का कहना है कि मृत पशुओं को दबाने की व्यवस्था गोशाला व बस्ती से दूर की जानी चाहिए। बरसात में बीमारियों के फैलने की आशंका रहती है। कुत्ते एवं कौवे खुले में पड़े पशुओं के अवशेष घरों में डालते हैं, जिससे परेशानी होती है। सलमा का कहना है दुर्गंध से घरों में मेहमानों ने आना बंद कर दिया है।
गोशाला के संरक्षक चौधरी कैलाश चंद का कहना है कि टिन शेड व गोशाला में मिट्टी भराव के लिए कई बार अधिकारियों के अवगत कराया जा चुका है। टिन शेड की न तो मरम्मत कराई गई है और न ही नए शेड का निर्माण कराया जा रहा है। उनका कहना है कि हरे चारे व पीने के पानी की व्यवस्था ठीक-ठाक है। समय पर उन्हें उपचार मिलता है।
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