कोरोना का असर कम होने पर कुछ ऑर्डर विदेशों से मिले भी थे, लेकिन बाद में वे भी निरस्त हो गए थे। हाल ये हो गया था कि काम न होने पर भी काष्ठकला कारोबारियों को अपने कारीगरों को मजदूरी देनी पड़ती थी। ऐसा न करते तो कारीगर किसी और काम में लग जाते और फिर कारीगरों का ही संकट हो जाता।
कारोबारियों ने साल की शुरुआत से ही नए डिजाइन के सैंपल बनाकर भिजवाने शुरू कर दिए थे। विदेशों में भी इस बार कोरोना से राहत मिली है। इस वजह से वहां से अच्छे खासे ऑर्डर मिल चुके हैं। अगस्त की शुरुआत तक ही 100 करोड़ से ऑर्डर मिल चुके हैं और अभी बंपर ऑर्डर मिलने की उम्मीद है।
निर्यातकों को मिलता है छूट का लाभ
काष्ठकला कारोबार को प्रदेश सरकार द्वारा ‘एक जिला, एक उत्पाद’ योजना में शामिल किया गया है। कारोबार को बढ़ावा देने के लिए सरकार पूरी कोशिश कर रही है, लेकिन सरकार द्वारा दी जाने वाली छूट का लाभ कारोबारियों के बजाए निर्यातकों को मिलता है।
काष्ठकला उद्यमी इसका लाभ उन्हें ही दिलाने की मांग कर रहे हैं। उद्यमी इरशाद मुल्तानी के अनुसार काष्ठकला उद्योग को पिछले साल बहुत नुकसान उठाना पड़ा है। सरकार के वनों की लकड़ियों को और महंगी करने और काम न मिलने की वजह से कारोबार ठप रहा। इस बार कारोबार को विदेशों से ऑर्डर मिल रहे हैं। उम्मीद है कि अगले साल के आखिर तक कारोबार फिर से पटरी पर आ जाएगा।