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नवंबर के शुरू में पेराई शुरू कर देंगी खांडसारी इकाई

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बिजनौर के ग्राम हजीपुरा खानपुर माधो के खांडसारी उद्योग में गुड़ बनाते कारीगर। - फोटो : BIJNOR
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नवंबर के शुरू में पेराई शुरू कर देंगी खांडसारी इकाई
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बिजनौर। जिले में इस साल पिछले साल के मुकाबले अधिक खांडसारी इकाइयां गन्ने की पेराई करेंगी। खांडसारी इकाइयां नवंबर के पहले सप्ताह तक गन्ने की पेराई शुरू कर देंगी। अनुमान है कि सीजन में एक करोड़ क्विंटल से अधिक गन्ने की पेराई होगी। सहायक चीनी आयुक्त डीपी मौर्य के अनुसार खांडसारी इकाइयों के चलने से शुगर मिलों पर गन्ने का दबाव कम होगा।
जिले में 144 लाइसेंस धारक गुड़ बनाने वाली इकाइयां हैं। दो इकाई चीनी बनाती हैं। जिले में सबसे अधिक रकबे में गन्ने की बुवाई होती है। इस साल गन्ने का रकबा पिछले साल के मुकाबले अधिक है। जिले में नौ चीनी मिल हैं। गन्ने की अधिकता के कारण शुगर मिलों पर गन्ना पेराई का दबाव रहता है। जिले में खांडसारी इकाइयों का जाल बिछा है, जो बड़ी मात्रा में गन्ने की पेराई करती हैं। सहायक चीनी आयुक्त डीपी मौर्य ने बताया कि पिछले पेराई सत्र में 48 खांडसारी इकाई चली थीं। शासन की टैक्स सरलीकरण नीति के चलते इस साल छह इकाई बढ़ी हैं। विभाग को 54 इकाई चलाने की सहमति मिल गई है। आठ खांडसारी इकाइयों ने पेराई दशहरे के आसपास शुरू कर दी थी। बाकी इकाइयों में से कुछ चल गई हैं। नवंबर के पहले सप्ताह में 54 खांडसारी इकाई चल जाएंगी।
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तीन चीनी मिलों के बराबर गन्ना पेरेंगी खांडसारी इकाई
बिजनौर। सहायक चीनी आयुक्त डीपी मौर्य के अनुसार खांडसारी इकाई सीजन में बिजनौर शुगर मिल जैसे तीन चीनी मिलों के बराबर गन्ना पेरेंगी। पेराई सीजन में खांडसारी इकाइयों द्वारा करीब एक करोड क्विंटल गन्ना पेराई करने का अनुमान है। पिछले सत्र में खांडसारी इकाइयों नें 65 लाख क्विंटल गन्ना पेरा था। एक इकाई दो ढाई लाख क्विंटल गन्ने की पेराई करती है। इस बार शुरुआत सीजन से ही गन्ने के रेट सही हैं। गुड़ की डिमांड बढ़ने व सीजन के आगे बढ़ने से रेट बढे़ंगे। इससे पेराई का आंकड़ा बढ़ सकता है।
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गुजरात और पंजाब से आने लगे गुड़ व्यापारी
बिजनौर। सहायक चीनी आयुक्त के अनुसार जिले में बने गुड़ की सबसे अधिक डिमांड गुजरात, पंजाब, राजस्थान में है। इन राज्यों के व्यापारी जिले में आकर गुड़ व्यापारियों से आपूर्ति तय कर लेते हैं। पिछले पेराई सीजन में खांडसारी इकाइयों ने साढे़ सात लाख क्विंटल गुड़ बनाया था। जबकि 51 हजार क्विंटल चीनी बनी थी। विभाग खांडसारी इकाइयों को शासन के तय मानकों के अनुसार सुविधा दे रहा है।
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