शमीम और सुरक्षा एजेंसी की गाड़ी।
- फोटो : amar ujala
मुजफ्फरनगर से खरीदकर वाया बिजनौर से कश्मीर तक असलहा की खेप पहुंचाई जाती रही या सिर्फ एक पिस्टल ही गया, एटीएस की जांच का यही अहम बिंदु है। लेकिन, जिस पिस्टल के साथ जावेद पकड़ा गया, वह उसने प्रेमिका के भाई को देने के लिए मंगाया था। पकड़े जाने से तीन दिन पहले ही शमीम ने पहुंचाया था।
दो दिनों तक एटीएस ने जिले में रहने के बाद पकड़े गए शमीम सलमानी और बेटे परवेज को ग्राम प्रधान की सुपुर्दगी में दे दिया था। हालांकि इनके कहीं आने-जाने पर रोक है। थाने में बताकर जाना होगा। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, अभी इस मसले की फाइल बंद नहीं हुई है। एटीएस मुजफ्फरनगर के उस व्यक्ति को भी तलाश रही है, जिससे शमीम ने पिस्तौल खरीदा। अगर वह नहीं भी मिला तो शमीम के खिलाफ फिर भी केस दर्ज हो सकता है।
यह भी पढ़ें: आखिर खुली पोल: अब नितिन पंत ने खोले मौलाना के खौफनाक राज, बोला- लड़कियों को फंसा धर्म परिवर्तन का बनाते थे दबाव
बता दें कि 19 सितंबर को शमीम का बड़ा बेटा जावेद कश्मीर में पिस्तौल के साथ पकड़ा गया था। 16 सितंबर को ही शमीम ने उसे पिस्तौल पहुंचाया था। जावेद के पकड़े जाने पर शमीम अपना बैग भी कश्मीर में ही छोड़ आया था। सूत्रों के अनुसार जावेद ने कश्मीर पुलिस को बताया था कि यह पिस्तौल प्रेमिका के भाई को देना था। पकड़ लिए जाने के तीन दिन बाद ही आर्मी इंटेलिजेंस और यूपी एटीएस ने डहरी में दबिश देकर जावेद के पिता और भाई को उठा लिया था।
यह भी पढ़ें: निशाने पर मौलाना के करीबी: सुरक्षा एजेंसियों ने पश्चिमी यूपी के जिलों में डाला डेरा, मुजफ्फरनगर से हाफिज को उठाया
दस लोगों पर खुफिया नजर
बताया जा रहा है कि शमीम ने किरतपुर के आठ और गांव के ही दो लोगों के नाम जांच एजेंसी को बताए थे, जोकि उनके परिचित हैं और कश्मीर में ही रहते हैं। जिसके चलते उन दस लोगों पर भी खुफिया नजर बनी हुई है। एटीएस फिर से जिले में आ सकती है।