बिजनौर का नजीबाबाद प्राइवेट बस अड्डा
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बिजनौर। प्रशासन बिजनौर-नजीबाबाद के प्राइवेट बस स्टैंड को खाली कराने में दिलचस्पी नहीं ले रहा हैं। एक साल पहले एडीएम कोर्ट ने बस स्टैंड को खाली कराने के आदेश दिए थे। तब से अभी तक ये मामला लटका हुआ हैं। नगर पालिका से लेकर प्रशासनिक अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
शहर के बीचोबीच कलक्ट्रेट से रोडवेज बस स्टैंड जाने वाले मार्ग पर नगर पालिका की भूमि में नजीबाबाद बस ओनर्स यूनियन का बस स्टैंड है। नगर पालिका ने 50 साल बस स्टैंड के लिए पांच साल को भूमि किराए पर दी थी। बाद में पांच- पंाच साल के लिए किराए की अवधि बढ़ती गई। अंतिम बार 15 जून 2015 को 1172 रुपये प्रति माह की दर से पांच साल के लिए इस जमीन का अनुबंध 14 जून 2010 तक के लिए हुआ। इसमें तय हुआ था कि आगे को किराएदारी बढ़ाने का अधिकार नगर पालिका को ही होगा। किराएदारी नहीं बढ़ने पर यह भूमि खाली करनी होगी। अनुबंध के दौरान ये भी शर्त थी कि भूमि खाली नहीं करने पर यूनियन 250 रुपये प्रतिदिन क्षतिपूर्ति के रूप में देगी।
14 जून 2010 के बाद बस स्टैंड के लिए किराए की अवधि नहीं बढ़ाई गई। नजीबाबाद बस ओनर्स यूनियन को कहा गया कि हाईकोर्ट व शासन के आदेशानुसार रोडवेज बस स्टैंड के समीप कोई प्राइवेट बस स्टैंड संचालित नहीं किया जा सकता। इसके बाद भी बस स्टैंड की भूमि को खाली नहीं किया गया। डीएम कोर्ट में सितंबर 2011 से चल रहे इस मामले में यूनियन की ओर से सिविल न्यायालय से स्टे ले लिया गया कि बिना विधिक प्रक्रिया अपनाए बस स्टैंड खाली नहीं कराए जाए। नगर पालिका की ओर से डीएम न्यायालय में एक वाद दायर करके प्रार्थना की गई कि बिजनौर- नजीबाबाद बस ओनर्स यूनियन बस यूनियन की भूमि से अपना निर्माण व मलबा हटाकर भूमि नगर पालिका को सौंप और 15 जून 2002 से अब तक क्षतिपूर्ति अदा करे।
नगर पालिका की ओर से सही पैरवी नहीं करने पर ये मामला एसडीएम बिजनौर की कोर्ट में विचाराधीन था। एसडीएम कोर्ट ने सात जुलाई 2019 को मामले में उत्तर प्रदेश लोक परिसर अनाधिकृत अध्याशियों की बेदखली अधिनियम 1972 की धारा पांच के तहत बस स्टैंड के बेदखली कराने के आदेश दिए गए। इसे तहत आठ लाख 21 हजार 500 रुपये का जुर्माना भी यूनियन को देने के निर्देश दिए गए।
तत्कालीन एसडीएम ब्रजेश कुमार ने एक माह में बस स्टैंड को खाली कराने के आदेश दिए। आदेश के खिलाफ कोर्ट से यूनियन ने स्टे ले लिया। स्टे भी खत्म हो गया। इसके बाद अभी तक बस स्टैंड खाली नहीं कराया गया हैं। एडीएम विक्रमादित्य मलिक के मुुताबिक ये मामला उनके संज्ञान में नहीं है। वे इस मामले को दिखवा रहे हैं।