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बिजनौर: अफजलगढ़ सीएचसी में तीन फीट तक भरा बारिश का पानी, तैर रहीं दवाइयां, डूबे उपकरण; चिकित्सा व्यवस्था ठप

Sun, 06 Sep 2026 01:29 PM IST
Mohd Mustakim अमर उजाला नेटवर्क, बिजनौर

सार

जिले की अफजलगढ़ सीएचसी में पानी निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण जलभराव की स्थित उत्पन्न हो गई है। मरीजों को यहां से किसी तरह निकाला गया है। स्वास्थ्यकर्मियों के आवासों में भी पानी भर गया है। 
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सीएचसी में पानी में तैर रहीं दवाइयां। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जिले में पिछले दो दिनों से हो रही लगातार बारिश के कारण अफजलगढ़ स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में तीन फीट तक पानी भर गया है। इस जलभराव से अस्पताल की ओपीडी, आपातकालीन कक्ष, एक्सरे रूम, औषधि भंडार, रिकॉर्ड रूम, चिकित्सक कक्ष, वार्डों और गैलरी सहित पूरा परिसर जलमग्न हो गया है।
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सीएचसी में भरा पानी। - फोटो : अमर उजाला
लाखों के नुकसान की आशंका
बारिश के पानी के कारण रिकॉर्ड रूम में रखे महत्वपूर्ण दस्तावेज खराब हो गए हैं। औषधि भंडार में रखी दवाइयां पानी में तैर रही हैं, जिससे लाखों रुपये की दवाइयों के खराब होने की आशंका है। साथ ही, विभिन्न उपकरणों के भी क्षतिग्रस्त होने की आशंका बनी हुई है। सीएचसी के आवासों में भी पानी भर जाने से वहां रहने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को भी लाखों रुपये के नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
 

स्वास्थ्य सेवाओं पर असर
जलभराव के कारण अस्पताल में भर्ती मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है। नीचे के तल पर रहने वाले स्वास्थ्य कर्मियों के परिवारों को भी उठने-बैठने और सोने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य कर्मियों के वाहन भी पानी में डूब गए हैं। पानी में तैरते जीव-जंतुओं से किसी अनहोनी की आशंका बनी हुई है। इस स्थिति के चलते अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप पड़ गई हैं।

प्रशासन को अवगत कराने के बाद भी ठोस कदम नहीं
जानकारी के अनुसार, यह सीएचसी निचले इलाके में स्थित है और वर्षा के पानी की निकासी का कोई उचित प्रबंध न होने के कारण हर साल जलभराव की समस्या उत्पन्न होती है। पिछले वर्ष भी इसी तरह की स्थिति उत्पन्न हुई थी, जिसके कारण करीब एक सप्ताह तक स्वास्थ्य सेवाएं बाधित रहीं और एक्सरे मशीन व अन्य उपकरणों के ठीक होने में एक महीने से अधिक का समय लगा था, जिससे विभाग को लाखों रुपये का नुकसान हुआ था। 
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स्वास्थ्य कर्मियों ने जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी और मुख्य चिकित्साधिकारी को इस समस्या से लिखित और मौखिक रूप से अवगत कराया है, लेकिन अब तक समस्या के समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इस वर्ष भी दवाइयों और उपकरणों के नुकसान की पूरी आशंका है।

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