Meerut News: मेरठ समेत वेस्ट यूपी की कई जिलों में झमाझम बारिश का दौर चल रहा है। कई जिलों में खेतों में पानी भर गया है। वैज्ञानिकों ने किसानों को चेताया है कि खेतों में ज्यादा समय तक पानी न भरा रहने दें, नहीं तो फसल की जड़ कमजोर होने से नुकसान हो सकता है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मानसून एक बार फिर पूरी तरह सक्रिय हो गया है। पिछले चार दिनों से लगातार हो रही बारिश ने मौसम का मिजाज बदल दिया है। मेरठ, बागपत, बिजनौर में सुबह से आसमान में बादल छाए रहने और रुक-रुककर झमाझम बारिश होने से तापमान में गिरावट आई है। उमस और गर्मी से परेशान लोगों को बड़ी राहत मिली है। सहारनपुर में काले बादल छाए हुए हैं। सितंबर के पहले सप्ताह में ही बारिश सामान्य से अधिक होने लगी है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अगले 24 घंटे तक बारिश का यह सिलसिला जारी रहने के आसार हैं।
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बागपत में बारिश से जलभराव।
- फोटो : अमर उजाला
सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डा. यूपी शाही के अनुसार, मानसून अभी सक्रिय स्थिति में है। यही वजह है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश हो रही है। अगले 24 घंटे तक मौसम का असर ऐसा ही बना रह सकता है। हालांकि मानसून की वापसी का समय धीरे-धीरे नजदीक आ रहा है, लेकिन लौटने से पहले मानसून की सक्रियता के कारण सितंबर के शुरुआती दिनों में अच्छी बारिश दर्ज की जा रही है।
गन्ने और खरीफ फसलों को फायदा
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, इस समय हुई बारिश से गन्ने की फसल को विशेष फायदा मिल रहा है। खेतों में पर्याप्त नमी पहुंचने से सिंचाई की जरूरत कम होगी। धान, बाजरा, ज्वार और अन्य खरीफ फसलों में भी बारिश से लाभ मिल सकता है। खासकर जिन खेतों में सिंचाई की कमी थी, वहां बारिश से फसल को राहत मिली है। किसानों के लिए यह बारिश खाद और पोषक तत्वों के बेहतर उपयोग में भी सहायक हो सकती है।
खेतों में जलभराव से नुकसान की आशंका
लगातार और तेज बारिश से जलभराव वाले खेतों में फसलों को नुकसान भी हो सकता है। धान की फसल में अत्यधिक पानी लंबे समय तक भरा रहने पर पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है। वहीं, जिन खेतों में बाजरा, ज्वार या सब्जियों की फसल तैयार है, वहां तेज बारिश और हवा से फसल गिरने तथा सब्जियों में सड़न और रोग लगने का खतरा बढ़ सकता है।
सब्जी उत्पादकों के लिए लगातार बारिश चिंता का कारण बन सकती है। खेतों में जल निकासी न होने पर पौधों की जड़ों में ऑक्सीजन की कमी होने लगती है, जिससे फसल प्रभावित हो सकती है। किसानों को खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था करने की सलाह दी जा रही है।
मानसून की वापसी से पहले बदला मौसम
सितंबर में मानसून की वापसी की प्रक्रिया शुरू होने से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मौसम का यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले दिनों में बारिश की तीव्रता में उतार-चढ़ाव हो सकता है, लेकिन मानसून पूरी तरह कमजोर होने तक बारिश का दौर बने रहने की संभावना है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों में जलभराव न होने दें। तैयार फसलों की नियमित निगरानी करें और तेज बारिश के बाद फसल में रोग या कीट के लक्षण दिखाई देने पर कृषि विशेषज्ञों की सलाह से ही दवा का प्रयोग करें।
मुजफ्फरनगर में लगातार बारिश, नदियां उफान पर
जिले में सुबह छह बजे से लगातार बारिश हो रही है। इससे आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। बाणगंगा और सोलानी नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है। लोगों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
शामली में सुबह से बारिश, मौसम सुहाना
जिले में सुबह से ही बूंदाबांदी चल रही है। आसमान में घने बादल छाये हुए हैं। तेज बारिश होने के आसार बने हुए हैं। बारिश से लोगों को गर्मी व उमस से राहत मिली है।