फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bijnor News: अमानगढ़ में बाघों की सुरक्षा में लगाई जाएगी एटीपीएफ

Wed, 24 Sep 2025 12:00 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
विज्ञापन
विज्ञापन
बिजनौर। अमानगढ़ में बाघों की संख्या लगातार बढ़ी तो शिकारियों की नजर भी इधर पड़ी थी। अब वन विभाग बाघों की सुरक्षा के लिए स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स तैनात करने की तैयारी कर रहा है। मार्च माह में पहली वार इसकी योजना बनी थी, अब वन विभाग दोबारा इस प्रस्ताव को भेजने में जुट गया है। इस टीम में इस यूनिट में पुलिस और पीएससी के जवान तैनात होंगे। अमानगढ़ को वर्ष 2012 में टाइगर रिजर्व फॉरेस्ट का दर्जा मिला था। करीब 9500 हेक्टेयर में फैले इस जंगल में 32 से ज्यादा बाघों का बसेरा है। तीन साल पहले अमानगढ़ को पर्यटकों के लिए भी खोल दिया गया था। बाघों के इस बसेरे पर अब से नहीं, बल्कि पिछले एक दशक से शिकारियों की नजर है। वर्ष 2012 में दो बाघों का शिकार अमानगढ़ से किया गया। रेहड़ क्षेत्र में दस से ज्यादा शिकारी भी पकड़े गए।
विज्ञापन

यहां पर स्टाफ की स्थिति देखें तो यहां 35 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से वन रक्षक, वन दरोगा और वाचर समेत आधे पदों पर भी स्टाफ तैनात नहीं हो पाया है। इस साल मार्च माह में बाघों और जंगल की सुरक्षा के लिए डीएफओ बिजनौर ने एक स्पेशल टाइगर प्रोक्टेक्शन फोर्स की एक यूनिट मांगी है। इसके लिए वन संरक्षक और मुख्य वन संरक्षक को पत्र लिखा गया है। इसके बाद यह प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया। अब बाघ का शिकार का मामला दोबारा पकड़ा गया तो फिर से इस यूनिट को तैनात करने के लिए प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
वहीं, अमानगढ़ रेंज कभी कार्बेट पार्क का ही हिस्सा हुआ करती थी। यूपी-उत्तराखंड बंटवारे के समय कार्बेट पार्क उत्तराखंड में चला गया। वहीं अमानगढ़ वन रेंज बिजनौर उत्तर प्रदेश के हिस्से में आ गई। इसका रकबा 9500 हेक्टेयर में है। करीब 8600 हेक्टेयर क्षेत्र टाइगर रिजर्व के तहत आता है। वहीं हालातों पर नजर डालें तो कार्बेट पार्क के पास बाघों की सुरक्षा के लिए बड़ी टीम है, पर सुरक्षा व्यवस्था बहुत ही लचर है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें