बिजनौर। गांव बिलाई निवासी टुकमान सिंह प्राथमिक शिक्षा लेने के बाद मिडिल तक की पढ़ाई के लिए हल्दौर के स्कूल में दाखिला लिया। मगर पढ़ाई से ज्यादा उनका मन आजादी के आंदोलन में लगने लगा। महज 12 साल की उम्र में उन्होंने छात्रों को साथ लेकर हल्दौर में जुलूस निकाला। जिसमें उन्हें चार महीने तक बच्चा जेल में रहना पड़ा।
अखिल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित परिवार कमेटी के जिलाध्यक्ष सुभाष सिंह उर्फ मुंशी ने अपने पिता टुकमान सिंह के तमाम किस्से साझा किए। सविनय अवज्ञा आंदोलन में हिस्सा लेने की वजह से 1932 में 11 माह तक बरेली जेल में रहे। 1942 में टुकमान सिंह को भारत छोड़ो आंदोलन में हिस्सा लेने की वजह से तीन माह सजा मिली और हैदरादाबाद की जेल में रखे गए।
16 अगस्त 1942 को चांदपुर में टुकमान सिंह ने अपने साथियों की मदद से रेलवे स्टेशन पर तोड़फोड़ और आगजनी की। टेलीफोन के तार काट दिए। इस मामले में टुकमान सिंह के घर की कुर्की हो गई थी।
सुभाष सिंह बताते हैं कि 1942 में अंग्रेज सरकार ने उनके पिता टुकमान सिंह को गोली मारने के आदेश जारी कर दिए थे। इन्ही आदेशों के चलते पुलिस ने उनके घर को घेर लिया। मगर टुकमान सिंह नौकर के सहयोग से वहां से निकल गए।