वैक्सीन की एक शीशी में आती हैं 20 डोज, चार घंटे में लगाना जरूरी
वैक्सीन की एक शीशी में 20 डोज आती हैं। जिसके चलते शीशी को एक बार खोलने के बाद चार घंटे के भीतर ही सभी डोज को उपयोग में लाना होता है। वहीं चार घंटे बाद किसी भी किशोर को खुली हुई शीशी में से वैक्सीन नहीं लगाई जाती है।
वैक्सीनेशन सेंटर पर अधिक संख्या में किशोर नहीं पहुंच रहे हैं, जिसके चलते अब तक वैक्सीन की 142 डोज खराब हो चुकी हैं। इसके साथ ही कोवैक्सीन की एक शीशी में 10 डोज आती थी, जबकि अब कॉर्बेवैक्स वैक्सीन की शीशी में 20 डोज आ रही हैं।
पहले हुए टीकाकरण में नहीं खराब हुई डोज : डॉ. अशोक कुमार
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि लोगों से अपील की जा रही है कि वैक्सीनेशन सेंटर पर पहुंचकर अधिक से अधिक संख्या में किशोरों को कोरोनारोधी टीका लगवाएं और डोज खराब होने से बचाएं। इससे पहले हुए टीकाकरण में डोज खराब नहीं हुई थी। पहली बार किशोरों के वैक्सीनेशन सेंटर पर न पहुंचने से डोज खराब हो रही हैं।