बिजनौर। बरसात में कभी धूप-कभी बरसात का मौसम तो चल ही रहा है, साथ ही उमस भी बढ़ रही है। ऐसे में संक्रमण, का खतरा भी बढ़ रहा है। खासतौर से बच्चों में यह समस्या ज्यादा हो रही है। इस समय बच्चों को बिना जुकाम, खांसी के ही छाती का संक्रमण हो रहा है। इससे उन्हें सांस लेने में भी परेशानी हो रही है। चिकित्सक घर में ताजी हवा के लिए गेट खोलने और नमी से बचने की सलाह दे रहे हैं।
जिले में पिछले डेढ़ माह से बारिश बनी हुई है। कभी मौसम ठंडा हो रहा है तो कभी धूप के साथ उमसभरी गर्मी हो रही है। ऐसे में एक आम समस्या है छाती में बलगम जमने की बच्चों में दिखाई दे रही है। चिकित्सकों का कहना है कि बरसात के दिनों में नमी और ठंडक बढ़ जाती है, जिससे वायरस और बैक्टीरिया तेजी से सक्रिय हो जाते हैं। यही वजह है कि आपको सर्दी-जुकाम के साथ बलगम की दिक्कत हो सकती है। चिकितसक कह रहे हैं कि मानसून सीजन में वायरल संक्रमण और रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इंफेक्शन के मामले बढ़ जाते हैं। छाती में इंफेक्शन से सांस लेने में परेशानी हो रही है तो वह सामान्य जुकाम नहीं, बलिक ब्रॉन्काइटिस, निमोनिया या अस्थमा के लक्षण भी हो सकते हैं। इसलिए चिकित्सीय सलाह भी जरूरी है। मेडिकल अस्पताल में रोजाना एलर्जी, सांस में परेशानी के करीब 20 से 30 मरीज रोजाना पहुंच रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा संख्या छोटे बच्चों की है।
परेशानी हो तो चिकित्सक को दिखाएं: राजेश कुमार
मेडिकल अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ राजेश कुमार ने बताया कि इस समय मौसम में नमी के कारण एलर्जी की समस्या बढ़ी। छोटे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, इसलिए उनमें यह समस्या जल्दी हो रही है। यदि किसी को सांस लेने में परेशानी दिखे तो तुरंत चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए।
यह लक्षण हो तो सचेत रहें
-कई दिनों तक जुकाम और खांसी हो तो चिकित्सक को दिखांए
-बच्चों को गीले कपड़े न पहनाएं, नमी से उनके कपड़े बचाकर रखें
-बच्चों को तेज गर्मी या ठंडी एसी की हवा में तुरंत न लेकर जाएं
-सीने में दर्द या सीटी जैसी आवाज हो तो चिकित्सक की सलाह लें
-आइसक्रीम और ठंडी चीजों को खिलाने से परहेज करें