फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

साहीवाल गाय ने विदेशी नस्ल को पछाड़ा

Tue, 05 Jul 2016 12:44 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला
विज्ञापन
देशी नस्ल की साहीवाल गाय - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
बिजनौर में  देशी तो देशी ही होता है। देशी नस्ल की गाय साहीवाल ने भी यह बात साबित कर दी है। दूध में पोषक तत्वों से लेकर बीमारियों से लड़ने की क्षमता तक में साहीवाल ने यूरोपीय नस्ल की गाय एचएफ (होलेस्टन फ्रीजन) को मात दे दी है। डेयरी व्यवसाय से जुड़े किसान भी अब होलेस्टन फ्रीजन से किनारा करके साहीवाल नस्ल की गाय पाल रहे हैं।
विज्ञापन

बीते कुछ सालों में दूध व्यवसाय में जिले में क्रांति सी आई है। पहले जिले में दूध का उत्पादन प्रतिदिन औसतन तीन लाख लीटर तक होती थी, जो अब बढ़कर नौ लाख लीटर तक पहुंच गई है। दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए किसान ने एचएफ गाय का सहारा लिया। एचएफ गाय की कीमत एक लाख तक होती है और यह 25 लीटर दूध प्रतिदिन तक रहती है, लेकिन ठंडे देशों में रहने वाली यह गाय जिले के 42 डिग्री तक रहने      वाले वातावरण में एडजस्ट नहीं  हो पाई। इसका असर ये हुआ कि गाय के दूध की धार बहुत पतली हो गई है। 
डेरियों पर दूध की कीमत का निर्धारण एसएनएफ (सोलिड नोट फैट) व फैट से होता है। जहां एचएफ के दूध में एसएनएफ सात प्रतिशत तथा फेट 30 से 35 प्रतिशत होता है। साहीवाल के दूध का एसएनएफ साढ़े आठ प्रतिशत से अधिक तथा फैट 45 प्रतिशत तक होता है।
विज्ञापन

 साहीवाल के दूध की किसानों को अच्छी कीमत मिल रही है। इसके अलावा एचएफ गाय में गर्भधारण न करने की समस्या भी जिले में बड़ा रूप लेती जा रही है। गांव जलालपुर छोईया निवासी किसान रविंद्र राणा के मुताबिक साहीवाल गाय ने एचएफ को पछाड़ दिया है। वे भी अब साहीवाल गाय पाल रहे हैं। 
दूसरे किसान भी साहीवाल की जानकारी लेने उनके पास आ रहे हैं। पराग डेयरी मुरादाबाद मंडल के प्रभारी एसआर राणा के मुताबिक एचएफ गाय में बहुत बीमारी आ रही हैं। यह नस्ल वेस्ट यूपी में सफल नहीं हो रही है। किसान फिर से देशी गायों की ओर रुख कर रहे हैं।

पोषक तत्वों की है कमी
पशु चिकित्साधिकारी डॉ. सुबोध पंवार के मुताबिक एचएफ गाय ठंडे देशों की है। तापमान 42 डिग्री तक हो जाता है। ऐसे में गाय का बीमार होना स्वाभाविक है। इसके अलावा गाय के दूध का उत्पादन अधिक होने के कारण उसमें पोषक तत्वों की कमी आ रही है। किसान इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। इससे गाय में गर्भाधान नहीं होने की समस्या आ रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें