Agriculture: Cholesterol Free Pusa Mustard-32 will make rich
कृषि : कोलेस्ट्रॉल फ्री पूसा सरसों-32 करेगी मालामाल
बिजनौर। नगीना स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में पूसा सरसों-32 का परीक्षण किया जा रहा है। जीरो कोलेस्ट्रॉल वाली यह प्रजाति किसानों को दोगुनी पैदावार देगी। किसान अब तक पीली सरसों बोते थे, लेकिन यह काली सरसों में अच्छी पैदावार वाली प्रजाति है। इससे किसानों की आय बढ़ेगी और इसका खाद्यान्न में प्रयोग करने वालों की भी सेहत को कोई नुकसान नहीं होगा।
किसान काली सरसों के अलावा पीली सरसों की भी बुवाई कर रहे हैं। पूसा-31 में काली सरसों के मुकाबले कोलेस्ट्रॉल कम होने की वजह से इसकी बहुत मांग रहती है। इसकी कीमत बाजार में इस समय नौ हजार रुपये प्रति क्विंटल तक चल रही है। जिले में हालांकि इस पीली सरसों की पैदावार एक क्विंटल प्रति बीघा तक रहती है। इसे देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने सरसों की नई प्रजाति पूसा सरसों-32 तैयार की है। यह भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान दिल्ली द्वारा तैयार की गई है। यह काली सरसों में है और यह कोलेस्ट्रॉल फ्री है। नगीना स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में यह प्रजाति बोई गई है। इसके अलावा इसका बीज बढ़ाने के लिए कुछ किसानों को भी दिया गया है। अच्छी पैदावार होने पर किसानों को यह प्रजाति दी जाएगी।
यह है प्रजाति की खासियत
यह प्रजाति 145 दिन में तैयार हो जाती है। इसमें 38 प्रतिशत तेल निकलता है। इसकी औसत पैदावार 27.10 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक रही है। इसमे इरूसिक एसिड की मात्रा 1.32 प्रतिशत रहती है, जबकि सामान्य प्रजातियों में यह 40 प्रतिशत से ऊपर होता है। इरूसिक एसिड शरीर में कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने के लिए जिम्मेदार होता है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. केके सिंह के अनुसार पूसा सरसों-32 के गुणों की वजह से इसे बोने वाले किसानों को फायदा होगा। ट्रायल में सफल होने पर इसका बीज किसानों को अगले साल दिया जाएगा।