बिजनौर। जिले को आवास विकास के बाद कोई आवासीय परियोजना नहीं मिली है। इससे जिले के कॉलोनाइजर फल फूल रहे हैं। इनकी मनमानी से जमीनों के दाम आसमान छू रहे हैं। इसकी वजह से जमीन लेकर मकान बनाना महंगा हो गया है।
महंगी जमीन की वजह से लोग शहर में अपना आशियाना बनाना मुश्किल होता जा रहा है। सरकारी आवासीय परियोजना नहीं आने से इसका सीधा फायदा बिजनौर के काॅलोनाइजरों को मिल रहा है। इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि शहर के आसपास इस समय करीब 50 निजी कॉलोनियां विकसित की जा रही हैं।
इनमें प्लॉटों की कीमत लगातार बढ़ाई जा रही है। कई जगहों पर बिना पर्याप्त सड़क, नाली, बिजली और पेयजल जैसी सुविधाओं के ही प्लॉट बेचे जा रहे हैं। इसके बावजूद लोग मजबूरी में महंगे दामों पर जमीन खरीदने को विवश हैं। नई सरकारी आवासीय योजना नहीं आने से लोगों के पास निजी कॉलोनियों का ही विकल्प बचा है। सरकारी योजनाओं में आमतौर पर सस्ती दरों पर प्लॉट और मकान उपलब्ध हो जाते हैं, लेकिन नई परियोजनाएं नहीं आने से मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। शहर में जमीन के दाम कई गुना तक बढ़ चुके हैं।