नजीबाबाद। दहेज उत्पीड़न का शिकार हुई एक महिला को न्याय मिलने में 32 साल लग गए। अब अदालत ने मामले में पीड़िता के पति और पति के भाई को दो-दो साल के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दो-दो हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया।
मंडावर के फ्रांस टोली निवासी जब्बार की बेटी शमीमा का विवाह नांगलसोती निवासी शकील से हुआ था। शमीमा ने आठ अक्तूबर 1993 को अपने पति शकील, उसके भाई ताहिर और सास सायरा के खिलाफ दहेज के लिए उत्पीड़न का मामला दर्ज कराया। पुलिस ने तीन आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया। तभी से सिविल जज जूनियर डिवीजन न्यायालय में मामला विचाराधीन रहा। सिविल जज जूनियर डिवीजन एकलव्य सरोज ने 32 साल बाद मामले का फैसला सुना कर पीड़िता को न्याय दिलाया। न्यायालय ने पति शकील और ताहिर को दो-दो साल की जेल और दो-दो हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। मामले की सुनवाई के दौरान सास सायरा की मृत्यु हो चुकी है। संवाद