बिजनौर। जनपद के 203 परिषदीय स्कूलों के जर्जर भवनों का मूल्यांकन किया जाएगा। इसके लिए बेसिक शिक्षा विभाग व प्रशासन ने इंजीनियर्स की टीम बनाई। इंजीनियर व अधिकारी धरातल पर पहुंचकर स्कूलों का मूल्यांकन कर रिपोर्ट विभाग को सौंपेगी। अमर उजाला ने परिषदीय स्कूलों की स्थिति को लेकर अभियान चलाया था। अभियान में सरकारी पाठशाला की बदतर हालातों से अवगत कराया।
जनपद में 2119 परिषदीय स्कूल संचालित है। इनमें करीब एक लाख 60 हजार विद्यार्थी अध्यनरत है। पिछले माह विलय होने से जरूर 301 विद्यालयों की संख्या कम हो गई थी। आपरेशन कायाकल्प के तहत भी स्कूलों में बहुत विकास कार्य हुए। राजस्थान के झालावाड़ में सरकारी स्कूल का भवन गिरने से बच्चों की मौत के बाद सभी स्कूूलों के भौतिक सत्यापन व ऑडिट करने के निर्देश दिए थे। अमर उजाला अखबार ने भी परिषदीय स्कूलों बदहाल स्थिति को सबसे के सम्मुख रखा। अखबार ने अभियान चलाकर सरकारी स्कूलों की दशा को उठाया। प्रदेश सरकार के हस्तक्षेप के बाद जिला प्रशासन व जिला बेसिक शिक्षा विभाग हरकत में आया। बेसिक शिक्षा विभाग ने जनपद के सभी खंड शिक्षा अधिकारियों से परिषदीय स्कूलों की दशा का निरीक्षण कराया। सभी खंड शिक्षा अधिकारियों ने बेसिक शिक्षा विभाग को 203 जर्जर स्कूलों की सूची सौंपी। अब पीडब्लूडी, आरईएस और लघु सिंचाई विभाग के सिविल अवर अभियंताओं से जर्जर स्कूलों की जांच कराई जाएगी।
हर ब्लाॅक से आई जर्जर स्कूलों की सूची के भवनों का इंजीनियर मूल्यांकन करेंगे। उनकी मूल्यांकन रिपोर्ट आने के बाद अग्रिम कदम उठाया जाएगा। किसी भी जर्जर कक्ष या बिल्डिंग में शिक्षण कार्य नहीं कराया जा रहा है।
-योगेंद्र कुमार, बीएसए
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अमर उजाला में प्रकाशित खबर।- फोटो : लाभार्थी को सांकेतिक चेक भेंट करते सीएम योगी आदित्यनाथ।