- वैज्ञानिकों का कहना- कोलेस्ट्रॉल फ्री पूसा सरसों-32 प्रजाति बीज
ब्रजवीर चौधरी
बिजनौर। जनपद के खेतों में अब पोषक तत्वों से भरपूर उन्नत प्रजाति की सरसोंं लहलहाएगी। पूसा सरसों - 32 का तेल कोलेस्ट्रॉल फ्री है। सरसों की पैदावार से न सिर्फ खेतों का स्वास्थ्य अच्छा रहेगा, बल्कि उन्नत प्रजाति सरसों के तेल से लोगों का स्वास्थ्य स्वस्थ रहेगा। उन्नत प्रजाति की सरसों का उत्पादन भी बंपर होने से किसानों की आय बढ़ेगी।
वर्तमान में जनपद में सरसों की बुवाई का समय है। सरसों की खेती करने से किसान कम लागत में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। वैज्ञानिक व कृषि अधिकारियों का कहना है कि किसान बुवाई पहले बीज को तीन ग्राम कार्बेंडाजिम या पांच ग्राम ट्राइकोडर्मा प्रति किलोग्राम बीज के दर से शोधित करें। एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में सरसों की बुवाई के लिए 4 किलोग्राम बीज की आवश्यकता पड़ती है। नगीना अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. केके सिंह का कहना है कि सरसों की बायोफोर्टीफाइड प्रजातियां स्वास्थ्य के लिए हितकर होती है और इनकी पैदावार भी अधिक होती है। सरसों पोषक तत्वों से भरपूर है।
ये हैं सरसों के प्रमुख प्रजाति बीज
कृषि विज्ञान केंद्र नगीना के वैज्ञानिक डॉ. केके सिंह ने बताया कि बायोफोर्टिफाइड प्रजातियों में प्रमुख रूप से पूसा सरसों -30, पूसा सरसों-31, पूसा सरसों- 32 और पूसा सरसों- 33 अच्छी प्रजाति हैं। कहा कि किसान सरसों की बुवाई करते समय उन्नत बीज का चयन करें। किसान बीज प्रमाणित संस्था से ही लें।
बुवाई के समय ये रखें ध्यान
बुवाई के समय सरसों में 100 किलोग्राम नाइट्रोजन, 50 किलोग्राम फास्फोरस, 25 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर की दर से एवं सरसों की गुणवत्ता युक्त उत्पादन के लिए सरसों में 25 किलोग्राम सल्फर प्रति हेक्टेयर की दर से अवश्य प्रयोग करें। - वैज्ञानिक डॉ. केके सिंह
वर्तमान में सरसों की बुवाई का उचित समय चल रहा है। कम समय में सरसों की फसल लेकर उसकी कटाई के उपरांत खेत में किसान गन्ना बुवाई कर सकते हैं। इससे फसल चक्र का पालन हो जाएगा। सरसों कम लागत में अधिक उत्पादन देने वाली फसल है। - जसवीर सिंह तेवतिया, जिला कृषि अधिकारी