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स्वच्छ भारत मिशन में नहीं दिया बेहतर रिजल्ट 17-05-29

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नजीबाबाद। सरकार के स्वच्छ भारत मिशन को विकास खंड की 11 ग्राम पंचायतें पलीता लगा रही हैं। प्रशासन चिह्नित ग्राम पंचायतों में शौचालय निर्माण की जांच में जुट गया है। जिले को ओडीएफ घोषित करने में जिला प्रशासन जल्दी कर गया। दरअसल क्षेत्र को खुले में शौच मुक्त करने में घोर लापरवाही बरतने वाली चार ग्राम पंचायतों को फेल करार दे दिया गया है।
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नजीबाबाद विकास खंड की 131 ग्राम पंचायतों में जहां कुछ ग्राम पंचायतों ने स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत बेहतर काम किया, वहीं कुछ ग्राम पंचायतों ने इसे मजाक बनाकर रख दिया। एक समान संसाधन, प्रोत्साहन और बजट मिलने के बावजूद कुछ ग्राम पंचायतों ने धनराशि का सदुपयोग नहीं किया। जनपद बिजनौर खुले में शौच मुक्त घोषित होने और जिलाधिकारी के सम्मानित के बाद भी नजीबाबाद विकास खंड के हालात कुछ जगहों पर खराब होने की रिपोर्ट मिली, तो प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मच गया।
प्रशासन ने स्वच्छ भारत मिशन में ग्राम पंचायतों में किए गए कार्यों की समीक्षा की, तो नजीबाबाद ब्लॉक की 11 ऐसी ग्राम पंचायतों को चिह्नित किया गया, जहां गांव में संतोषजनक सफाई कार्य नहीं मिला। यहां तक कि शौचालय निर्माण में भी अनियमितता बरती गई। चिह्नित की गईं ग्राम पंचायतों में काशीरामपुर, मुअज्जमपुर सादात, इस्सेपुर, मीरमपुर बेगा, जालपुर, रामनगर, प्रेमपुरी, गिरदावा साहनपुर, पुरनुपर नरोत्तम, आजमपुर गाजी, रानीपुर शामिल हैं। इनमें चार ग्राम पंचायतों गिरदावा साहनपुर, रानीपुर, पुरनपुर नरोत्तम और आजमपुर गाजी को रेड केटेगिरी में रखते हुए ओडीएफ अभियान में फेल करार दिया गया है।
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जल्द सुधार के प्रयास किए जाएंगे
बीडीओ अनवर शेख ने बताया कि सभी चिह्नित 11 ग्राम पंचायतों में अपेक्षित कार्य न होने पर रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी गई है। सीडीओ डॉ.इंद्रमणि त्रिपाठी स्वयं इसमें संज्ञान ले रहे हैं। मामले में कार्रवाई के साथ साथ ग्राम पंचायतों में सुधार कराने के प्रयास शुरू किए जाएंगे। प्रभारी एडीओ पंचायत कुलदीप सिंह ने बताया कि पंचायतों में मॉनिटरिंग और कुछ मेहनत के साथ जल्द सुधार के प्रयास किए जाएंगे।

कार्रवाई से फूटा गुस्सा
मुअज्जमपुर सादात के ग्राम प्रधान हरिश्चंद्र का गुस्सा आखिरकार फूट पड़ा। उन्होंने अमर उजाला को फोन पर बताया कि ओडीएफ में शौचालय निर्माण सत्यापन के लिए आई टीम ने सुविधा शुल्क की डिमांड की थी। सुविधा शुल्क न देने पर यह हश्र हुआ। ग्राम प्रधान ने इसकी शिकायत विकास विभाग के अधिकारियों से करने की जानकारी दी।
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