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डिग्री कॉलेज के 80 हजार छात्र होंगेे प्रमोट

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डा.मुकेश कुमार। - फोटो : BIJNOR
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डिग्री कॉलेज के 80 हजार छात्र होंगेे प्रमोट
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बिजनौर। कोरोना के कारण रूहेलखंड विश्वविद्यालय की परीक्षा नहीं होंगी। जिले के करीब 80 हजार बिना परीक्षा दिए पास हो जाएंगे। एमजेपी रूहेलखंड विश्वविद्यालय टीचर्स एसोसिएशन (रूटा) समेत छात्र नेताओं ने फैसले को सही बताया है।
जिले में रूहेलखंड विश्वविद्यालय से संबद्ध 108 डिग्री कॉलेज हैं। इनमें शेरकोट में राजकीय डिग्री कालेज, बिजनौर, धामपुर में दो-दो तथा नजीबाबाद व चांदपुर में एक-एक शासन से सहायता प्राप्त डिग्री कॉलेज हैं। इनके अतिरिक्त 101 स्वपोषित डिग्री कॉलेज हैं। डिग्री कॉलेजों के संस्थागत व व्यक्तिगत करीब 80 हजार विद्यार्थी परीक्षा में शामिल होते हैं। कोरोना के कारण परीक्षा होने को लेकर असमंजस की स्थिति थी। रूटा तथा छात्र नेता कोरोना महामारी को देखते हुए परीक्षा हटाने की मांग कर रहे थे, इस पर शासन ने मेरठ विश्वविद्यालय की अध्यक्षता में चार सदस्यीय समिति गठित की थी। समिति ने रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। समिति ने कोरोना को देखते हुए परीक्षा नहीं कराने तथा छात्रों को अगली कक्षा में प्रमोट करने की सलाह दी है।
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समिति का फैसला है सही
एमजेपी रूहेलखंड विवि टीचर्स एसोसिएशन अर्थात रूटा के अध्यक्ष तथा वर्धमान कॉलेज बिजनौर में रसायन विज्ञान विभाग के प्रोफेसर मुकेश कुमार का कहना है कि रूटा ने परीक्षा स्थगित कराने के लिए मुख्यमंत्री को मांगपत्र भेजा था। पदाधिकारी वीसी प्रोफेसर अनिल कुमार शुक्ल से भी मिले थे। परीक्षा में छात्रों व अभिभावकों की भीड़ रहती है। इससे कोरोना संक्रमण का खतरा था। समिति का फैसला एक दम सही है।
छात्र हित में लिया गया है फैसला
एबीवीपी के रोबिन चौधरी ने फैसले को छात्र हित में बताया है। कहा कि यदि केंद्र पर किसी एक को भी कोरोना मिल जाता तो सभी को खतरा था। इससे छात्रों की परीक्षा को लेकर चल रही उलझन समाप्त होगी।
परीक्षा कराना खतरे से खाली नहीं
छात्र नेता मोहित राजपूत का कहना है कि कोरोना के मामले अभी लगातार सामने आ रहे हैं। स्कूल कॉलेज बंद हैं। ऐसे में परीक्षा कराना खतरे से भरा था। समिति का फैसला स्वागत योग्य है। फैसला छात्रों की सुरक्षा के लिए सही है।
छात्रों की सुरक्षा है पहले
पूर्व छात्र नेता नृपेंद्र देशवाल ने परीक्षा हटाने के निर्णय को सही बताया है। कोरोना संकट में छात्रों की सुरक्षा पहले है। ग्रामीण छात्राओं के लिए संतुष्टि देने वाला फैसला है।
सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना हो जाता कठिन
नूरपुर के छात्र नेता पारस चौधरी के अनुसार परीक्षा में भीड़ रहती है। जगह-जगह के बच्चे आते हैं। कुछ के अभिभावक भी साथ आते हैं। ऐसे में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराना कठिन हो जाता। समिति ने परीक्षा नहीं कराने का फैसला एक दम सही लिया है। छात्राओं को इससे बड़ी राहत मिलेगी।
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संक्रमण का था ज्यादा खतरा
युवराज त्यागी का कहना है कि परीक्षा में प्रवेश के समय गेट पर भारी भीड़ रहती है। नार्मल स्थितियों में छात्रों को कंट्रोल करने में परेशानी होती है। आपाधापी में संक्रमण का खतरा था। इसलिए फैसला ठीक है।

रोबिन चौधरी।- फोटो : BIJNOR

मोहित राजपूत।- फोटो : BIJNOR

पारस चौधरी।- फोटो : BIJNOR

युवराज त्यागी।- फोटो : BIJNOR

नृपेंद्र देशवाल।- फोटो : BIJNOR

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