सुबह के समय छाया रहा घना कोहरा, वाहनों के पहियों की रफ्तार पड़ी धीमी
दोपहर में सूर्यदेव के दर्शन होने से लोगों ने ली राहत की सांस
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बिजनौर। शीतलहर के चलते सोमवार को चौदह दिन बाद स्कूल खुले जरूर पर कड़ाके की सर्दी से स्कूलों में बच्चे असहज दिखाई दिए। सुबह के समय घना कोहरा भी स्कूल जाते बच्चों के लिए परेशानी का सबब लेकर आया। परिषदीय स्कूलों में टाट पट्टी पर बैठे बच्चे तो दिनभर ठिठुरते रहे। दोपहर करीब एक बजे सूर्य देव के दर्शन होने पर लोगों ने राहत की सांस ली।
जिले में कड़ाके की ठंड का प्रकोप जारी है। डीएम के निर्देश पर नर्सरी से कक्षा आठ तक के स्कूलों में ठंड को देखते हुए एक जनवरी से अवकाश चल रहा था। पर रविवार को सूर्य देव के दर्शन जल्द होने पर छुट्टी खत्म कर दी गई। 14 दिन की छुट्टी के बाद सोमवार को स्कूल खुले। आसमान में घना कोहरा छाया रहा। कोहरा घना होने के कारण वाहनों के पहियों की रफ्तार भी कम रही। प्रशासन ने स्कूलों का संचालन सुबह 10 बजे से करने के आदेश दिए थे। स्कूल संचालन के समय में भी घना कोहरा होने से बच्चे रिक्शा में बैठे तथा दुपहिया वाहनों पर भी ठिठुरते दिखाई दिए। कोहरे के साथ चल रही हल्की हवा के झोकों ने भी आने जाने वालों को परेशान किया। परिषदीय स्कूलों में बच्चों की बैठक व्यवस्था के लिए टाट पट्टी है। अधिकांश स्कूलों के फर्श में भी सीलन होने से टाट पट्टी पर बच्चों को बैठाना मुसीबत बना रहा। स्कूल समय में कड़ाके की ठंड से हर कोई परेशान रहा। अभिभावक संतराम सिंह, दीपक सिंह, राजीव कुमार, सोमपाल आदि का कहना था कि इतनी ठंड में बच्चों को टाट पट्टी पर बैठाना ठीक नहीं है। दोपहर करीब एक बजे सूर्य देव के दर्शन होने से लोगों ने राहत की सांस ली है।
16 व 22 जनवरी को स्कूलों में रहेगा अवकाश
बिजनौर। सचिव बेसिक शिक्षा परिषद इलाहाबाद संजय सिन्हा ने परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक व मान्यता प्राप्त स्कूलों में 16 जनवरी को मौनी अमावस्या और 22 जनवरी को बसंत पंचमी का अवकाश घोषित किया है। बीएसए महेश चंद्र ने सचिव बेसिक शिक्षा के आदेश की पुष्टि करते हुए जिले के खंड शिक्षा अधिकारियों से आदेश का अनुपालन कराने के निर्देश दिए हैं।
स्कूली बच्चों के लिए ठंडा रहा सोमवार
नींदडू़ 15 जनवरी। करीब दो सप्ताह बाद खुले कक्षा-8 तक के स्कूलों में बच्चों के लिए सोमवार का दिन किसी प्रकार की राहत लेकर नहीं आया। दोपहर बाद तक घना कोहरा छाए रहने के कारण छात्र-छात्राओं की उपस्थिति अपेक्षा से काफी कम रही। कई अभिभावकों ने कोहरे, शीत लहर व कड़ाके की ठंड के कारण अपने बच्चों को स्कूल पढ़ने नहीं भेजा। अधिकांश लोग दोपहर बाद तक घरों में छिपे रहे।