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राज्य सूचना आयुक्त की प्रेस कॉंफ्रेंस

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राज्य सूचना आयुक्त हाफिज उस्मान की प्रेस कान्फ्रेंस
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फोटो- 06एनजेडबी06आर
नजीबाबाद। राज्य सूचना आयुक्त ने कहा कि सूचना का अधिकार सस्ता, पाक और साफ कानून है। वर्ष 2005 में लागू सूचना के अधिकार कानून नियमावली में वर्ष 2015 में परिवर्तन किए गए थे। इन परिवर्तनों से अनभिज्ञ आम नागरिक सूचना के अधिकार का पूरी तरह लाभ नहीं ले पा रहे हैं।
लोनिवि कार्यालय में प्रेस कान्फ्रेंस में राज्य सूचना आयुक्त हाजी मो.उस्मान ने जन सूचना अधिकार कानून नियमावली में वर्ष 2015 में किए गए परिवर्तनों की जानकारी देते हुए कहा कि जन सूचना अधिकार के अंतर्गत अब आवेदक को 500 से ज्यादा शब्दों की सूचना लेने और सूचना में आवेदक को क्या, क्यों और कैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना है, अन्यथा आवेदन निरस्त हो जाएगा। कहा कि मात्र 10 रुपये के पोस्टल आर्डर या 10 रुपये की धनराशि के साथ सूचना मांगते समय जन सूचना अधिकार 2005 का उल्लेख करना भी जरूरी है।
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एसडीएम सत्येंद्र कुमार सिंह, सीओ बृजराज सिंह, नायब तहसीलदार सीके त्रिपाठी की उपस्थिति में राज्य सूचना आयुक्त हाजी मो.उस्मान ने कहा कि 30 दिन के बाद जानकारी देना संबधित जन सूचना अधिकारी को कानून के दायरे में लाता है। कहा कि मुरादाबाद की मंडलीय बैठक सहित प्रदेश के विभिन्न जनपदों में मीटिंग व ट्रेनिंग के माध्यम से स्पष्ट कर चुके हैं कि प्रथम अपीलीय अधिकारी को स्पीकिंग ऑर्डर के माध्यम से समस्या को निस्तारित करके राज्य सूचना आयोग के सामने बढ़ते बोझ को कम करना है।
राज्य सूचना आयुक्त ने सभी अधिकारियों को कार्यालय के बाहर जन सूचना अधिकारी, अपीलीय अधिकारी का नाम फोन नंबर अंकित करने, एक सप्ताह के भीतर अपील पर सुनवाई करने और निचले स्तर पर ही समस्या का निस्तारण करने की सलाह दी। हाजी मो.उस्मान ने कहा कि राज्य सूचना आयुक्त पर 5 से 6 हजार मामले जन सूचना अधिकार के तहत प्रतिदिन पहुंचते हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल में 1.5 लाख मामले निस्तारित किए हैं।
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कानूनी कार्रवाई से बचें : राज्य सूचना आयुक्त
विधायक हाजी तसलीम अहमद, इकराम अंसारी की उपस्थिति में राज्य सूचना आयुक्त ने कहा कि उन्होंने प्रदेश के अधिकारियों को स्पष्ट किया है कि यदि कोई भी सूचना जो उनके कार्यालय पहुंचती है। यदि उनके कार्यालय से संबंधित नहीं है तो एक सप्ताह के भीतर प्रार्थना पत्र को संबंधित विभाग को भेजकर वादी को सूचना देकर राज्य सूचना आयोग की कानूनी कार्रवाई से बचें। उन्होंने स्पष्ट किया कि सूचना के अधिकार में समस्त उन विभागों को शामिल किया गया है जो सरकारी हैं अथवा जिन्हें सरकार विभिन्न रूपों में पैसा देती है। सपा नेत्री आयशा सिद्दीकी ने नजीबाबाद में मीट कारोबार बंद होने से कारोबारियों के परेशान होने तथा प्रशासन द्वारा मदद न करने का मामला उठाया तो राज्य सूचना आयुक्त ने कहा कि मीट कारोबार की समस्या आप के क्षेत्र के ही जन प्रतिनिधि की दी हुई समस्या है।
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