व्यापारियों पर चढ़ गया 36 करोड़ का ब्याज
बिजनौर। कोरोना महामारी के दौरान व्यापारियों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। बैंकों का कर्ज चुुकाने के लिए व्यापारियों और उद्योगपतियों को हर महीने मोटा ब्याज देना होता है। कोरोना कर्फ्यू में आमदनी तो हुई नहीं, लेकिन ऋण पर ब्याज बढ़ता चला गया। इस ब्याज पर किसी तरह की कोई छूट नहीं दी गई है। एक अनुमान के मुताबिक जिले के व्यापारियों को 36 करोड़ रुपये का ब्याज देना होगा। अब व्यापारी इस ब्याज में छूट देने की सरकार से मांग कर रहे हैं।
जिले में व्यापारियों और उद्योगपतियों पर बैंकों का 1500 करोड़ से ज्यादा का कर्ज है। व्यापारियों को 12 से 14 प्रतिशत का सालाना ब्याज देना होता है, इस हिसाब से यह रकम 120 करोड़ रुपये बैठती है। यानि व्यापारियों को हर महीने करीब 18 करोड़ और हर दिन औसतन 60 लाख का ब्याज देना होता है। अप्रैल में कोरोना महामारी के कारण लोग घर से नहीं निकले तो पूरा मई कोरोना कर्फ्यू की भेंट चढ़ गया। ऐसे में व्यापारियों पर बैंकों का कर्ज और बढ़ गया। जिले में बुधवार को कोई कोरोना संक्रमित मरीज नहीं मिला। बाजार में सड़कों पर खूब भीड़ आ रही है, लेकिन ये भीड़ ग्राहकों की नहीं बल्कि आने जाने वाले लोगों की रही। व्यापारियों की आमदनी अब भी पुराने स्तर पर नहीं लौटी है, जिससे व्यापारी परेशान हैं। उन पर दो महीने में 36 करोड़ का ब्याज चढ़ गया है। व्यापारियों का कहना है कि व्यापार के लिहाज से अभी हालात सुधरे नहीं हैं। हालात को सुधारने के लिए सरकार को कुछ छूट देनी चाहिए।
सरकार को करनी चाहिए व्यापारियों की चिंता
उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल नगर अध्यक्ष सचिन राजपूत का कहना है कि व्यापारी बहुत परेशान हैं। व्यापारियों पर ब्याज तो चढ़ ही रहा है, लेकिन सरकार की ओर से रियायत की कोई घोषणा नहीं की गई है। व्यापारी सबसे ज्यादा टैक्स देते हैं, उनकी सुध सरकार को जरूर लेनी चाहिए। मानव सचदेवा के अनुसार व्यापार से ही बैंक के ब्याज की किस्त जमा होती है। कोरोना की वजह से काफी समय से व्यापार बुरी तरह प्रभावित है। व्यापारियों को व्यापार संभालने का मौका भी नहीं मिल रहा और ब्याज भी देना है। सरकार को बैंक कर्ज के ब्याज में छूट देनी चाहिए। तभी व्यापार की हालत सुधर सकती है।