धामपुर। धामपुर चीनी मिल की ओर से इस बार किसानों को और अधिक सहूलियतें देने और गड़बड़ी को रोकने के उद्देश्य से चीनी मिल क्षेत्र के 200 गन्ना क्रय केंद्रों में से 100 केंद्रों को डिजिटल लोड सेल से जोड़ दिया है। इन सभी 100 केंद्रों पर मिल गेट की तर्ज पर कंप्यूटरीकृत तरीके से गन्ने की खरीद होगी।
चीनी मिल के गन्ना जीएम आजाद सिंह ने वार्ता में बताया कि जनपद बिजनौर की अन्य चीनी मिलों की तुलना में धामपुर चीनी मिल का यह प्रथम प्रयास है। इसके अंतर्गत चीनी मिल क्षेत्र के सभी 200 गन्ना क्रय केंद्रों में से 100 केंद्रों पर ऑनलाइन डिजिटल लोड सेल प्लान के तहत जोड़ कर गन्ना खरीद की जाएगी। अभी तक सभी 200 केंद्रों पर सामान्य तौर पर गन्ना खरीद की जाती थी। डिजिटल लोड सेल प्लान से जोड़े गए इन सभी 100 केंद्रों पर चीनी मिल गेट के कांटों की तर्ज पर खरीद होगी। आजाद सिंह ने यह भी बताया कि किसानों की गन्ने की कटाई, छिलाई से लेकर ट्रैैक्टर ट्राली में गन्ना भराई के लिए मिल की ओर से हार्वेस्टर मशीन की व्यवस्था की गई है। डीएसएम ग्रुप ने तीन मशीनों की इसके लिए व्यवस्था की है, पर धामपुर चीनी मिल के हिस्से में केवल एक ही मशीन आई है। बड़ी बात यह है कि यह मशीन केवल ट्रैंच विधि से उगाए गन्ने वाले प्लाटों में चलेगी। सामान्य तौर पर बोए प्लाटों में यह मशीन नहीं चल पाएंगी। इस मशीन को प्रति एकड़ किराया क्या होगा। अभी निर्धारण नहीं किया जा सका है।
प्रतिदिन छह एकड़ क्षेत्रफल में खड़े गन्ने की करेगी कटाई, छिलाई व भराई
आजाद सिंह ने बताया कि यह हार्वेस्टर मशीन एक दिन में छह एकड़ क्षेत्रफल में खड़े गन्ने की कटाई छिलाई और ट्रैक्टर ट्राली में भराई करेगी। मशीन का उपयोग करने से लेबर पर आने वाले खर्च से कम खर्च आएगा। दूसरे खेत में समान तरीके से कटाई होगी। यह मशीन गन्ने के अगोले को अलग कर देगी और खेत में खड़े खरपतवार और गन्ने की पत्ती को भूसे के समान महीन कर खेत में बिछा देगी, जिससे खेत में ट्रस मिल्चिंग रेंडम होने से खेत की उपजाऊ क्षमता और बढ़ेगी। ऐसा करने से पैदावार बढ़ने की और संभावना बढ़ जाएगी।
200 किसानों के पास है, छह-छह एकड़ वाले गन्ना प्लाट
जीएम ने बताया कि मिल क्षेत्र में करीब 200 किसान ऐसे हैं, जिसके पास छह-छह एकड़ के गन्ना प्लाट है। इन सभी को मिल की ओर से सूचीबद्ध कर लिया गया है। संबंधित किसानों को छह एकड़ प्लाट के हिसाब से एक ही बार में पर्ची उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे मशीन संबंधित किसान के प्लाट में खड़े गन्ने को एक दिन में काटकर खाली कर दें।
लेबर के टोटे से निपटने को उठाया कदम
जीएम ने बताया कि पिछले सालों में देखा गया है कि किसानों के पास समय से गन्ना पर्चियों को डालने के लिए गन्ने की कटाई व छिलाई नहीं हो पाती थी। अबकी बार ऐसा नहीं होगा। जहां किसान का काम लेबर न मिलने से पिछड़ता था वहीं बासी गन्ने की आपूर्ति होने से मिल को भी नुकसान रहता था। चीनी की रिकवरी डाउन रहती थी। ऐसा होने से अब न तो किसान को नुकसान होगा और न ही मिल को नुकसान की संभावना होगी।