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नियमित दवा के सेवन से 305 रोगियों ने कुष्ठ को कहा अलविदा

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नियमित दवा के सेवन से 305 रोगियों ने कुष्ठ को कहा अलविदा
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बिजनौर। कुष्ठ रोग अभिशाप नहीं है। नियमित उपचार कर पूरी तरह से इसकी जकड़ से छुटकारा पाया जा सकता है। जिले के 305 मरीजों ने इसे सही साबित कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। केवल अप्रैल से अब तक नियमित दवा के सेवन से कुष्ठ रोग खात्मा कर दिया गया है। रिलीज फॉर ट्रीटमेंट (आरएफटी) में शामिल हुए 305 मरीज अब पूरी तरह से सामान्य जीवन जी रहे हैं।
महात्मा गांधी की पुण्य तिथि को विश्व कुष्ठ उन्मूलन दिवस के रूप में मनाया जाता है। स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान के अंतर्गत 30 जनवरी को शहरी एवं ग्रामीण मलिन बस्तियों में स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्पर्श कुष्ठ जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। ग्राम प्रधानों और नगर पंचायतों तथा नगर पालिकाओं के मुखिया जिलाधिकारी द्वारा घोषित शपथ पढ़ेंगे। इससे लोगों को इस रोग के प्रति जागरूक किया जाएगा।
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राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के नोडल अधिकारी शैलेश जैन ने बताया कि कुष्ठ रोग लाइलाज नहीं है। छह माह से एक साल तक का सही तरह से उपचार की जरूरत है। सिर्फ नियमित उपचार और सावधानी की जरूरत है। अप्रैल माह से अब तक कुल 305 मरीज कुष्ठ रोग पूर्ण रूप से आजादी पा चुके हैं। यह रोग पूर्णत: मल्टी ड्रग थेरेपी (एमडीटी) द्वारा ठीक किया जा सकता है। समय से शीघ्र उपचार किया जाए तो यह पूर्ण रूप से ठीक हो जाता है।
कुष्ठ रोग की दो अवस्थाएं होती हैं
राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के नोडल अधिकारी शैलेश जैन के अनुसार कुष्ठ रोग की दो अवस्थाएं होती हैं। पहली में व्यक्ति के शरीर पर लाल अथवा पीले रंग के पांच निशान या चकत्ते दिखाई देते हैं। इसे पॉसिबल बेसलरी (पीबी) में रखा जाता है। ऐसे मरीजों का छह माह तक इलाज चलाया जाता है। इसके बाद वे इस रोग से पूरी तरह से मुक्त हो जाते हैं। दूसरी श्रेणी में मरीज के शरीर पर पांच से अधिक लाल या फिर पीले रंग के चकत्ते पाए जाने पर संबंधित रोगी का एक साल तक इलाज चलता है। इस प्रकार के मरीज मल्टी बेसलरी (एमबी) की श्रेणी में आते हैं। प्रथम अवस्था वाले मरीज को केवल छह माह और द्वितीय स्थिति में पहुंचने वाले मरीज को एक साल तक एमडीटी नामक दवा का सेवन करना पड़ता है। एमडीटी दवाई सभी सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क उपलब्ध है।
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कुष्ठ रोग के लक्षण
कुष्ठ रोग एक दीर्घकालीन (पुराना) संक्रामक रोग है। इसमें त्वचा पर हल्के रंग के धब्बे दिखाई देते हैं, जो कुष्ठ की शुरुआती पहचान कराते हैं। यह तंत्रिकाओं, त्वचा और आंखों को प्रभावित करता है। कुष्ठ रोग बैक्टीरिया (माइक्रोबैक्टीरियम लेप्रे) के कारण होता है और अनुपचारित कुष्ठ रोग ग्रस्त व्यक्ति के जीवाणु द्वारा फैलता है। संक्रामक जीवाणु व्यक्तियों की नाक एवं मुंह से बाहर निकलता है। विशेष रूप से नाक के रास्ते शरीर से बाहर निकलता है।
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