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मिड डे मील का खंगाला जा रहा रिकॉर्ड

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263 दिन के मिड-डे मील का देना होगा हिसाब
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बिजनौर। कोविड-19 के चलते स्कूली बच्चों को मध्याह्न भोजन के अंतर्गत उपलब्ध कराए गए खाद्यान्न एवं धनराशि का शिक्षकों को हिसाब देना होगा। 263 दिन के मिड-डे मील का रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। जिले के सभी खंड शिक्षा अधिकारी मिड-डे मील के रिकॉर्ड का सत्यापन करेंगे।
कोविड-19 के चलते स्कूलों में बच्चों का अवकाश रहा है। शासन के निर्देश पर स्कूली बच्चों को मिड-डे मील के कन्वर्जन कास्ट के धनराशि व खाद्यान्न वितरण करने के आदेश दिए गए थे। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के आदेश को माने तो प्रथम चरण में 76 दिन के कन्वर्जन कास्ट की धनराशि व खाद्यान्न जिसमें अप्रैल से जून 2020 तक दूसरे चरण में 49 दिन जुलाई से अगस्त 2020 तक तीसरे चरण में 138 दिन सितंबर 2020 से लेकर 28 फरवरी 2021 तक के खाद्यान्न वितरण का रिकॉर्ड जांचा जाएगा । कुल मिलाकर 263 दिन के खाद्यान्न का रिकॉर्ड जांचने के आदेश से शिक्षकों व ग्राम प्रधानों में हड़कंप मचा है। दूसरे व तीसरे चरण का खाद्यान्न 15 जुलाई तक बांटने के आदेश दिए गए हैं । शासन के निर्देश पर मध्यान भोजन की धनराशि व खाद्यान्न को जिले के सभी विकास क्षेत्रों में खंड शिक्षा अधिकारी सत्यापन करेंगे। मध्याह्न भोजन का रिकॉर्ड जांचे जाने के आदेश से शिक्षकों में खलबली मची है। बताया जाता है कि काफी संख्या में ऐसे भी स्कूल हैं जिनमें अभी तक ग्राम प्रधानों के साथ खातों का हस्तांतरण भी नहीं हुआ है। ऐसे में रिकॉर्ड को आनन-फानन में जांचने के आदेश शिक्षकों के गले नहीं उतर रहा है।
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दूसरी और उत्तर प्रदेश के प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला मंत्री प्रशांत सिंह ने बताया कि काफी संख्या में ऐसे भी स्कूल हैं, जिन्हें मध्याह्न भोजन के तहत स्कूलों को खाद्यान्न भी पर्याप्त मात्रा में राशन डीलरों द्वारा उपलब्ध नहीं कराया गया है, जिस कारण शिक्षकों को राशन वितरण कराने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। खंड शिक्षा अधिकारी अजय कुमार ने बताया कि शिक्षकों को खाद्यान्न वितरण में कन्वर्जन कास्ट का रिकॉर्ड चुस्त दुरुस्त करने को कहा गया है, ताकि शासन को सूचना समय पर भेजी जा सके।
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आनन-फानन में लिया जा रहा रिकॉर्ड
जिले के परिषदीय प्राइमरी व उच्च प्राइमरी विद्यालय में करीब 222000 पंजीकृत छात्र-छात्राएं हैं। इसके अलावा मान्यता प्राप्त 57 उच्च प्राथमिक विद्यालय वह इंटर कॉलेजों के भी कक्षा 6 से 8 तक के छात्र-छात्राएं मध्याह्न भोजन से लाभान्वित होते हैं। जिले में करीब तीन लाख छात्र मध्याह्न भोजन से लाभान्वित होते हैं। इन सभी छात्र छात्राओं का आनन-फानन में रिकॉर्ड मांगना शिक्षकों के लिए मुसीबत बन गया है। बताया जाता है कि संकुल प्रभारियों के माध्यम से शिक्षकों से खाद्यान्न व कंन्वर्जन कास्ट का रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को कहा गया है।
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