नूरपुर। सीतापुर में हुए सड़क हादसे के समय विधायक लोकेंद्र चौहान की गाड़ी चला रहा सचिन उनका नियमित कार चालक नहीं था। वह नियमित चालक अंकित की अनुपस्थिति में उनकी कार पर चालक का काम करता था। सचिन पहली बार विधायक की कार ड्राइव कर लखनऊ जा रहा था। नियमित कार चालक अंकित के छुट्टी पर जाने की वजह से विधायक सचिन को साथ लेकर लखनऊ के लिए निकले थे।
सीतापुर के कमलापुर थाना क्षेत्र में हुए सड़क हादसे में विधायक के साथ कार चला रहे सचिन की भी उपचार के दौरान मौत हो गई। विधायक के पिता महेश सिंह के मुताबिक सचिन करीब तीन वर्ष से उनके यहां काम कर रहा था। वह लोकेंद्र चौहान के कार चालक अंकित की अनुपस्थिति में उनकी कार चला लिया करता था। अंकित तीन दिन से छुट्टी पर घर गया हुआ था। मंगलवार की रात लोकेंद्र चौहान को लेकर लखनऊ के लिए निकलना था। वह नूरपुर से करीब 11 बजे घर आलमपुरी पहुंचे थे और कपड़े आदि बदलकर साढ़े ग्यारह बजे कार लेकर लखनऊ के लिए निकल गए। कार को अंकित की अनुपस्थिति में सचिन चला रहा था। सुबह करीब पांच बजे सीतापुर के कमलापुर थाना क्षेत्र के पास नींद की झपकी आने पर कार डिवाइडर पार करती हुई सामने से आ रहे ट्रक से टकरा गई। हादसे में कार में बीच वाली सीट पर सो रहे विधायक सहित उनके गनर दीपक व बृजेश के अलावा निजी सचिव तरुण की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कार चला रहे सचिन ने भी बाद में उपचार के दौरान अस्पताल में दम तोड़ दिया।
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विधायक की मौत से क्षेत्र में दौड़ी शोक की लहर
नूरपुर। भाजपा विधायक लोकेंद्र चौहान की मौत से उनके गांव आलमपुरी ही नही, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। जिसने भी उनकी मौत की खबर सुनी वह उनके गांव की ओर दौड़ पड़ा। दोपहर तक उनके आवास पर क्षेत्र के हजारों लोगों की भीड़ जमा हो गई। उधर, प्रशासनिक अधिकारियों ने अंतिम संस्कार में वीवीआईपी के आने की संभावना के चलते युद्घस्तर पर तैयारियां शुरू कर दीं। विधायक के आवास के पास ही हैलीपैड भी बनाया जा रहा है। एडीएम व एसपी आरए गांव में मौजूद रहकर व्यवस्था बनाने में जुटे हैं।
साफ सुथरी छवि होने के कारण लोकेंद्र चौहान आम लोगों में लोकप्रिय थे। क्षेत्र की जनता से सुख दुख में वह हमेशा साथ रहते थे। गरीब से गरीब व्यक्ति भी उनके पास पहुंचता था तो वह उससे गले लगकर मिलते थे तथा उसकी समस्या का निस्तारण करते थे। कई बार वह सही काम न करने पर प्रशासनिक अधिकारियों से भी भिड़ जाया करते थे। अपनी इसी शैली के कारण वह जनता के बीच गहरी पकड़ बना चुके थे।
बुधवार की सुबह जैसे ही उनकी मौत की खबर फैली तो लोग स्तब्ध रह गए। इसके बाद लोगों का उनके गांव आलमपुरी पहुंचने का तांता लग गया। दोपहर एक बजे तक हजारों की संख्या में लोग उनके आवास पर एकत्र हो गए। आवास पर मौजूद उनके पिता महेश सिंह बेटे की मौत पर गहरे सदमे में हैं। उन्होंने बताया कि लोकेंद्र का सपना नूरपुर विधानसभा ही नहीं पूरे जनपद का विकास कराकर जनपद को मिसाल बनाना था। इसके लिए वह रात दिन प्रयास करते रहते थे।