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पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला करने के विवाद में जमानत याचिका निरस्त

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पुलिसकर्मियों पर हमला करने वालों को नहीं मिली जमानत
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बिजनौर। जिला एवं सत्र न्यायाधीश रमेश तिवारी ने ग्राम मुकीमपुर धर्मसी उर्फ खेड़ा में रामलीला की जमीन पर जबरन रास्ता निकालने, रोकने पर पुलिस बल पर जानलेवा हमला करने के आरोप में चार आरोपियों की जमानत याचिका निरस्त कर दी है।
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शासकीय अधिवक्ता श्यामस्वरूप शर्मा के अनुसार थाना कोतवाली शहर के एसआई जगत सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 29 जुलाई 2018 को शाम के करीब सात बजे वे पुलिस बल के साथ शांति व्यवस्था की ड्यूटी पर थे। जंदरपुर गांव के पास उन्हें मनोज से सूचना मिली कि गांव मुकीमपुर धर्मसी में रामलीला मैदान पर जहां रामलीला का मंचन होता है, वहां रामलीला की जमीन में दूसरे संप्रदाय के लोग रास्ता निकाल रहे हैं। जबकि हिंदू समाज का कहना था कि यहां कोई रास्ता नहीं है। सूचना पर वे पुलिस बल के साथ वहां पहुंचे और दोनों समुदाय के लोगों को बातचीत के लिए बुलाना चाहा। मुस्लिम समाज से मीर हसन, मोहम्मद हाशिम, कासिम, इरशाद, नूर हसन, अबूशाद, अरशद व इनकी पत्नी, बेटे-बेटी व 20-25 लोग लाठी-डंडे, तलवार और नाजायज अस्लहा लेकर आ गए और पुलिसवालों को घेर लिया। उन्होंने सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न करते हुए पुलिसकर्मियों को जान से मारने की नीयत से अपने हथियारों से फायर किया। पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट भी की। इस घटना से गांव में सनसनी फैल गई। लोगों ने डर के मारे अपने घरों के खिड़की दरवाजे बंद कर दिए। इस घटना में तीन पुलिसकर्मियों को गंभीर चोट आई थी। थाने को सूचना देने पर वहां से प्रभारी निरीक्षक के नेतृत्व में भारी पुलिस बल मौके पर आया और पुलिसकर्मियों को बचाया। हमलावर पुलिसकर्मियों को जान से मारने की धमकी देकर फरार हो गए। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने मोहम्मद हाशिम, कासिम, अबूशाद व अरशद को गिरफ्तार कर चालान कर दिया था। जिला जज ने इस मामले में पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमले को गंभीर अपराध मानते हुए आरोपियों की जमानत याचिका निरस्त कर दी है।
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