बिजनौर। कान्हा पशु आश्रय स्थल में निर्माण में हुए खेल में अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया। मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं में शामिल इस योजना में गड़बड़ सामने आने के बाद डीएम ने गोशालाओं के निर्माण की जांच बैठा दी है। जांच में तकनीकी टीम को भी शामिल किया गया है। टीम को जल्दी ही जांच करके रिपोर्ट देने को कहा गया है। इसके अलावा डीएम ने सभी गोशालाओं में गोबर गैस प्लांट बनाने के निर्देश भी दिए।
निराश्रित गोवंश द्वारा खेतों में नुकसान किए जाने के मामले सुर्खियों में आने के बाद प्रशासन ने कान्हा पशु आश्रय स्थलों का निर्माण कराना शुरू किया था। बिजनौर में 12 नगर पालिकाओं को गोशाला बनाने के लिए करीब 31 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। जिले में नगर पालिकाओं में 3400 गोवंश की क्षमता वाली गोशालाएं बननी थीं, लेकिन फिलहाल दस गोशालाओं में केवल 686 गोवंश ही रखे जा सकते हैं। दो गोशालाओं का निर्माण चल रहा है। नगर पालिकाओं ने गोशाला निर्माण में रुपये तो लगाए लेकिन उन्हें पशु क्षमता के मानक से बहुत कम बनाया। कुछ पालिकाओं ने तो यह तक बताने से मना कर दिया कि उनकी पशु रखने की क्षमता कितनी है। सभी गोशालाओं में गोबर गैस प्लांट बनाने के भी आदेश दिए गए थे। पशुओं के गोबर से गैस बनाकर उसे इस्तेमाल करने व खाद को किसानों को बेचने का प्रावधान था। लेकिन किसी भी नगर पालिका ने गोबर गैस प्लांट नहीं बनवाया।
मुरादाबाद कमिश्नर की जांच में इसका खुलासा हुआ था। अमर उजाला ने इस खबर को 25 जून को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद अब जिला प्रशासन भी जागा है। डीएम सुजीत कुमार ने कान्हा पशु आश्रय स्थल निर्माण के मामले में जांच को समिति बना दी है। समिति में कई अधिकारियों के अलावा तकनीकी जांच टीम को भी रखा गया है।
डीएम सुजीत कुमार के अनुसार कान्हा पशु आश्रय स्थल निर्माण की जांच कराने के लिए समिति बना दी गई है। शासन से भी जांच कराने के लिए पत्र मिला है। उन्होंने कहा कि जांच में दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी।