बिजनौर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा के अनुसार किसानों का फसली ऋण माफ करने की कवायद तेज हो गई है। इस संबंध में अपर निदेशक राकेश कृष्ण ने बैंकों को शासनादेश जारी किया है। बैंकों से घोषणा में शामिल होने वाले किसानों का ब्यौरा मांगा जा रहा है। ऋण माफी का शासनादेश जारी होने से घोषणा में शामिल होने वाले किसानों को राहत मिलेगी।
प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामनवमी पर हुई कैबिनेट की सबसे पहली बैठक में किसानों का कर्ज माफ करने की घोषणा की थी। घोषणा में सीमांत व लघु किसानों को शामिल किया गया है। 31 मार्च से 2016 से पहले फसली ऋण लेने वाले किसानों को इस योजना में शामिल किया गया है। जिन किसानों ने 31 मार्च 2017 तक ऋण जमा न किया था, उसमें से एक लाख तक का ऋण माफ होना था। राज्य सरकार की घोषणा के बाद बैंकों ने किसानों के खाते खंगालने शुरू कर दिए थे। बैंकों द्वारा निकाले गए इनपुट के अनुसार जिले के 95 हजार 923 किसान केंद्र सरकार की इस घोषणा में फिट बैठते हैं। इन किसानों पर 1051 करोड़ रुपये का कर्जा है। कर्ज माफी के लिए अब शासनादेश भी जारी कर दिया गया है। शासन ने बैंकों से घोषणा के अनुसार बैंकों से किसानों की जमीन व उन पर ऋण की सूची मांगनी शुरू कर दी है। शासनादेश जारी होने के बाद अब किसानों को ज्यादा इंतजार नहीं करना होगा। जल्दी ही कर्ज माफी की राशि किसानों के खातों में जमा हो सकती है। कर्ज माफी की घोषणा में उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास को छोड़कर बाकी सभी बैंक शामिल होंगे। उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास में फसली ऋण के बजाए सावधी ऋण दिया जाता है।
सीमांत-लघु किसानों का ऋण होगा माफ
सीमांत किसान के पास एक हेक्टेअर तक व लघु किसान के पास दो हेक्टेअर तक जमीन होती है। एक हेक्टेअर में करीब साढ़े 12 बीघा व दो हेक्टेअर में 25 बीघा जमीन तक होती है।
सपा सरकार में माफ हुआ था 24 करोड़
सपा सरकार में भी किसानों का कर्ज माफ किया गया था। लेकिन तब केवल उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक से जुड़े किसानों का ऋण ही माफ किया गया था। तब घोषणा की शर्तों के अनुसार करीब नौ हजार किसानों का करीब 24 करोड़ का ही ऋण ही माफ हुआ था।
बैंकों से मांगी जा रही सूचना, कवायद तेज