अमर उजाला ब्यूरो
धामपुर। लोगों का अपेक्षित सहयोग न मिलने से स्वास्थ्य विभाग की ओर से संचालित सघन इंद्रधनुष मिशन कार्यक्रम को जमकर पलीता लग रहा है। कुछ परिवारों की ओर से अवरोध पैदा करने से अभियान की सफलता पर प्रश्नचिह्न लगता नजर आ रहा है। 18 जनवरी तक अभियान का यह अंतिम चरण है।
पीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. पीके गुप्ता ने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से समूचे देश में एक साथ एक ही तिथियों पर दो साल की आयु के बच्चों और गर्भवती महिलाओं को विभिन्न कई प्रकार की बीमारियों से बचाव को सघन इंद्रधनुष मिशन के तहत टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान की सफलता के लिए सरकार की ओर से सभी सरकारी विभागों के अधिकारियों, कर्मचारियों को बतौर सहयोग के लिए लगाया गया है। यह कार्यक्रम अक्तूबर 2017 से चल रहा है। पहला चरण नौ अक्तूबर, दूसरा सात नवंबर, तीसरे सात दिसंबर और चौथा और अंतिम चरण आठ जनवरी से शुरू हुआ है। जो 18 जनवरी तक चलेगा। चिकित्साधिकारी ने विभाग की ओर से जो दो साल की आयु के बच्चे और गर्भवती महिलाओं की टीकें लगाए जा रहे है। वह आठ बीमारियों से रोकथाम करेगा। इन बीमारियों में तपेदिक, टिटनेस, काली खांसी, पोलियो, गलघोटूं, खसरा, निमोनिया और पीलिया रोग शामिल है। अल्हैपुर ब्लाक की 97 पंचायतों में इस अंतिम चरण में 2,824 दो साल की आयु के बच्चों को टीके लगाने का लक्ष्य है। दो दिन चले कार्यक्रम के तहत 875 बच्चों का टीकाकरण हो चुका है। 484 गर्भवती महिलाओं का इस चरण में टीकाकरण होना है। पर इनमें से अब तक 149 को टीके लगाए जा चुके है।
अल्हैपुर ब्लाक में लगभग 359 परिवार कर रहे अवरोध
स्वास्थ्य विभाग की टीम में शामिल अधिकारियों ने बताया कि इस कार्यक्रम में कुछ परिवार अवरोध कर रहे हैं। अधिकारियों के समझाने के बाद भी खत्म होने का नाम नहीं ले रहे है। अब तक कार्यक्रम में करीब 359 अवरोधित परिवार सामने आ चुके है। इनमें से 20-25 परिवारों को समझाबुझाकर दो साल के बच्चों और गर्भवती महिलाओं को टीके लगाए जा चुके है।