जेल में 100 बंदियों ने की बहनों से फोन पर बात
बिजनौर। भाईदूज पर जिला कारागार में बंद भाई बहनों का अटूट प्यार कायम रहा। जेल में एक मुकदमे में बंद दो बहनों ने वहीं अपने भाइयों को तिलक करके दीर्घायु की कामना की। जेल प्रशासन की ओर से 100 भाइयों की बहनों से मोबाइल पर बात कराई गई। 60 बहनें अपना गोला, रोली व मिठाई जेल के गेट पर दे गईं। यह सब उनके भाइयों तक पहुंचा दी गईं। जो बहनें जेल में भाइयों को टीका करने पहुंची, उनकी इंटर कॉम से जेल के अंदर भाइयों से बात करा दी गई।
जिला कारागार में 1115 बंदी हैं। कोरोना के चलते भाईदूज पर जेल में बहनों के भाइयों के तिलक करने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई थी। यह निर्देश दिए गए थे कि जो भाई-बहन किसी मुकदमे में जेल के अंदर बंद हैं वहां बहन भाई को तिलक करके दीर्घायु की कामना कर सकती है। जिला कारागार में 40 महिला बंदी बंद हैं। इनमें दो महिलाएं ऐसी हैं जो अपने भाइयों के साथ एक ही मुकदमे में जेल में बंद हैं। इन दोनों बहनों ने जेल में ही अपने भाइयों को तिलक करके गोला दिया व उनकी दीर्घायु की कामना की। जेल में बंद करीब 100 बंदियों की जेल प्रशासन ने उनकी बहनों से फोन पर बात कराई। दो दिन पहले से ही कोरोना के चलते जेल में बंद बंदियों के गोले, रोली, मिठाई व अन्य सामान गेट पर लेना शुरू कर दिया गया था। सोमवार को भी जेल के गेट पर यह सामान लिया गया। तमाम बहनें यह सामान लेकर जेल के गेट पर पहुंची। जेल में भैया दूज पर विशेष भोजन की व्यवस्था की गई थी जो बंदियों को खिलाया गया। जेल अधीक्षक लाल रत्नाकर सिंह और जेलर शैलेंद्र प्रताप सिंह के मुताबिक भैया दूज पर बाहर से बहनों को भाइयों का तिलक करने की इजाजत नहीं दी गई। कोरोना की वजह से इस पर रोक थी। बहनों से सामान लेकर भाईयों को पहुंचा दिया गया।
हल्दौर में भाईदूज
हल्दौर। सोमवार भाईदूज के मौके पर बहनों ने अपने भाइयों के माथे पर तिलक करके उनकी दीर्घायु की कामना की। अपने मायके जाने वाली महिलाएं की सुबह से ही आवागमन शुरू हो गई। सुबह से ही सड़कों पर दुपहिया वाहनों की भीड़ देखने को मिली। साथ ही महिलाओं को कई स्थानों पर सड़क किनारे जाने के लिए वाहनों का इंतजार करती देखी गई। साथ ही कुछ भाई भाईदूज पर अपनी बहनों के घर पहुंचे। नगर समेत क्षेत्र के गांव कुम्हापुरा, नांगलजट, नवादा तुल्ला, बल्दिया, कूकडा इस्लामपुर, बिलाई, पैजनियां, अम्हेड़ा, पावटी आदि गांवों में भैया दूज बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।