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भत्ते में कर रहे थे खेल, कसा शिकंजा

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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोपीगंज परिसर में कब्जा जमाए फार्मासिस्ट समेत तीन कर्मचारियों पर शिकंजा कस गया है। सीएचसी अधीक्षक ने कब्जा हुए दो भवनों को ढहवा दिया जबकि एक कर्मी अब भी भवन नहीं छोड़ रहा है। सभी को रिकवरी नोटिस भेजने के साथ ही विधिक कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है।
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शासन का निर्देश है कि सरकारी दफ्तरों में काम करने वाले कर्मचारी तहसील, जिला मुख्यालय पर ही निवास करें। जिससे आम जन से जुड़ी योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन हो सके। विकास भवन, बेसिक शिक्षा, कलेक्ट्रेट सहित अन्य विभागों में काम करने वाले कर्मचारियों को सरकार किराए पर रहने के लिए आवासीय भत्ता देती है। इसमें कुछ कर्मचारी सरकारी आवासों में रहने के साथ ही तथ्य छुपाकर भत्ता भी हासिल करते हैं। अधिवक्ता आदर्श त्रिपाठी ने सीएचसी में तैनात फार्मासिस्ट, एएनएम और कर्मचारी से जुड़े एचआरए की सूचना अधीक्षक से मांगी थी।
तीनों कर्मचारी सीएचसी परिसर में ही सरकारी आवास में कई साल से रहते हैं। आरटीआई से मांगी सूचना में कर्मचारी मूलचंद्र ने तीन दशक में करीब चार लाख, एएनएम रीना ने छह साल तीन माह में 83 हजार और फार्मासिस्ट सुजीत कुमार तीन साल छह माह में 46 हजार 620 रुपये एचआरए लिया। उक्त मामले को संज्ञान में लेते हुए अधीक्षक आशुतोष पांडेय ने दो भवनों को ढहवा दिया लेकिन अब भी एक कर्मचारी भवन से नहीं हटा रहा है। उन्होंने बताया कि जांच में यह बात सामने आई है कि एक भवन दशकों पुराने कुएं पर निर्मित है। उन्होंने आवासीय भत्ते की वसूली को लेकर नोटिस जारी किया है।
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