फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हर्षोल्लास के साथ मनाई गई तुलसीदास की जयंती

विज्ञापन
विज्ञापन
जिले में धूमधाम हर्षोल्लास के साथ बृहस्पतिवार को संत शिरोमणि बाबा तुलसीदास की जयंती मनाई गई। अलग-अलग स्थानों पर आयोजित कार्यक्रम में तुलसीदास के बारे में लोगों को बताया गया। ज्ञानपुर पुरानी बाजार और सीतामढ़ी में तुलसी जयंती मनाई गयी।
विज्ञापन

हिंदी साहित्य परिषद के बैनर तले हनुमत निकेतन प्रांगण में जयंती मनाई गई। कार्यक्रम की शुरूआत मां सरस्वती की प्रतिमा एवं तुलसीदास की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया गया। सरस्वती वंदना दीनानाथ पाठक ने किया और तुलसी वंदना डॉ. राजकुमार पाठक ने। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जय प्रकाश मिश्र मिलिंद को तुलसी सेवा साहित्य सम्मान से सम्मातिन किया गया। उनकी पुस्तक आंजनेय का लोकार्पण भी हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मानस मर्मज्ञ पं. राधेश्याम तिवारी ने कहा कि रामचरित मानस तुलसीदास की कालजयी रचना है। परिषद के अध्यक्ष डॉ. राजकुमार पाठक ने कहा कि तुलसी का साहित्य समन्वय का साहित्य है। परिषद के सचिव सुरेश पांडेय मंजुल ने कहा कि दुनिया की हर समस्या का समाधान तुलसी साहित्य में हैं। उनका रामचरित मानस स्वीकार का ग्रंथ है। उन्होंने आगे कहा कि सनातन धर्म कभी भी तुलसी के ऋण से मुक्त नहीं हो सकता है। रामेश्वर राय व संत मंशाराम ने संगीममय प्रस्तुति देकर लोगो को भाव विभोर किया। चंद्रभूषण पाठक, विद्यापति कोकिल, प्रतिमा शर्मा, पारसनाथ मिश्र, कैलाश नाथ (घायल), अर्जुन मुसाफिर, अजय विश्वकर्मा, संदीप कुमार, कन्हैयालाल दूबे आदि ने काव्य पाठ किया। अखिल राष्ट्रीय रामायण मेला के तत्वावधान में सीतामढ़ी लवकुश इंटरमीडियट कॉलेज में तुलसीदास जयंती मनाई गई। रामायण मेला अध्यक्ष मुन्ना लाल पांडेय ने कहा कि जो जन्म तेरा नहीं होता, तो राम का नाम कौन लेता... संगीतमय पाठ करके लोगों को भाव-विभोर किया। इस मौके पर सालिकराम दुबे, केशव दुबे, विजय मोहन, ऋषभ देव सिंह आदि कार्यकम में उपस्थित रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें