ज्ञानपुर। प्रधानमंत्री उज्ज्वल योजना के सिलिंडर डकारने वाले संचालकों पर प्रशासन का शिकंजा कसना शुरू हो गया है। डीएम राजेंद्र प्रसाद की सख्ती के बाद पूर्ति विभाग ने गोलमाल करने वाले एजेंसी संचालकों की सूची बना रहा है। डीएम के साथ ही पेट्रोलियम मंत्रालय इनके खिलाफ पत्र लिखा जाएगा।
ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में उपली, लकड़ी आदि पर खाना बनाने वाली महिलाओं को सहूलियत देने के लिए 2016 में केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना चलाई। जिसमें लाभार्थियों को नि:शुल्क सिलिंडर और चूल्हा दिया गया। दो चरणों में 2016 से 2019 तक करीब 42 एजेंसी से जिले में करीब एक लाख पांच हजार लाभार्थी चयनित हुए। इसमें इंडेन, एचपी, भारत गैस कंपनी के लाभार्थी शामिल रहे। संचालकों और उनके सहयोगियों की ओर से योजना में मनमानी की गई। 17 मई को अमर उजाला ने संचालक डकार गए दो हजार सिलेंडर शीर्षक से खबर प्रकाशित की। मामले को जिलाधिकारी ने भी संज्ञान में लिया। डीएम के निर्देश पर चिह्नित कर संचालकों पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है, जिन्होंने लाभार्थियों का सिलेंडर बेच दिया।
जिला पूर्ति अधिकारी अमित कुमार तिवारी ने कहा कि एजेंसी सं चालकों की ओर से उज्ज्वला योजना का सिलिंडर लाभार्थियों को न देने का मामला सामने आया है। जिलाधिकारी ने भी मामले में रिपोर्ट मांगी है। शिकायत के बाद संचालकों को नोटिस भेजकर तलब किया है। बताते चलें कि जमुनीपुर अठगवां निवासी विजय बहादुर पाल और गड़ेरियापुर निवासी जगदीश कुमार समेत सैकड़ों लाभार्थियों ने डीएम, एसडीएम और पूर्ति अधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर गुहार भी लगाई है।