बरसात के बाद कालीन नगरी में कड़ाके की ठंड जारी है। रविवार को भी आसमान में कोहरे की चादर तनी रही। दृश्यता कम होने से रेल और सड़क यातायात भी प्रभावित हुआ। रविवार को छह ट्रेने निर्धारित समय से पांच घंटे विलंबित रही, वहीं सड़कों पर वाहन रेंगते हुए नजर आए। ठंड के कारण लोग ठिठुरे रहे। तीसरे दिन भी दोपहर बाद चंद घंटे के लिए सूर्यदेव के दर्शन तो जरूर हुए, लेकिन धूप वह ताप नहीं दे सकी जिसकी अपेक्षा लोगों ने की थी।
मौसम का मिजाज पूरे नवंबर और दिसंबर के पहले पखवारे में सामान्य रहा। दूसरे पखवारे की शुरुआत के साथ ही ठंड ने दस्तक दे दी। बारिश के बाद मौसम पूरी तरह से बदल चुका है। ठंड और गलन में बेहिसाब इजाफा हो जाने से जन-जीवन बेहाल हो उठा है। घने कोहरे से चलते सड़कों पर वाहनों की रफ्तार थम गई। गर्म कपड़ों से लदे होने के साथ टोपी व रूमाल आदि का प्रयोग कर कान ढंके देखे गए। कोहरे के कारण प्रयागराज- वाराणसी खंड पर चलने वाली दानापुर-उधना स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एक्सप्रेस पांच घंटे, दिल्ली- मडुवाडीह पांच घंटे, सिकंदराबाद एक घंटे, वाराणसी- प्रतापगढ़ रेल रूट पर चलने वाली गोरखपुर- दादर एक्सप्रेस तीन घंटे, काशी विश्वनाथ तीन घंटे विलंब से स्टेशन पर पहुंची। इससे गंतव्य को जाने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। सिक्सलेन से लेकर ज्ञानपुर- भदोही, औराई- भदोही, मिर्जापुर- गोपीगंज सहित अन्य छोटी सड़कों पर दिन में वाहन लाइट जलाकर धीरे-धीरे निकले।
ठंड से राहत देने के लिए नगर पंचायत ज्ञानपुर प्रशासन की ओर से गिने-चुने स्थानो ंपर अलाव जलाया गया। नगर के दुर्गागंज रोड त्रिमुहानी सहित अन्य स्थानों पर अलाव जलवाए जाने से लोगों ने राहत महसूस किया, लेकिन नथईपुर, पुरानी देहाती मार्ग पर अलाव न जलने सेलोग परेशान रहे। इसी तरह गोपीगंज, भदोही, घोसिया और खमरिया में भी गिने-चुने स्थानों पर ही अलाव जले।