ज्ञानपुर। कॉलेजों की लापरवाही कहें या विभाग की उदासीनता। जिले के तीन हजार छात्र-छात्राओं को शुल्क प्रतिपूर्ति से वंचित होना पड़ा है। मार्च में शासन स्तर से प्रतिपूर्ति की राशि जारी होने के बाद वंचित विद्यार्थी समाज कल्याण, पिछड़ा वर्ग कल्याण समेत अन्य विभागों का चक्कर लगा रहे हैं।
जिले में 193 माध्यमिक और इंटर कॉलेज, 20 से अधिक मदरसे, 25 महाविद्यालय और 15 तकनीकी शिक्षण संस्थान संचालित हैं। इन संस्थानों में पढ़ने वाले सामान्य, ओबीसी, एससी और अल्पसंख्यक वर्ग के छात्रों को छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ दिया जाता है। अक्तूबर 2024 से आवेदन की प्रक्रिया शुरू की गई। आनलाइन आवेदन, सत्यापन, अग्रसारित करने की कवायद करीब तीन महीने तक चली। जनवरी-फरवरी में दोबारा सत्यापन कर सबमिट करने का मौका दिया गया। विभागीय अधिकारियों ने कई बार बैठकें की हैं, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हो सका। इसका असर मार्च में शुल्क प्रतिपूर्ति जारी होने पर देखने को मिला। छात्रों के फार्म की जांच कर सत्यापित करने के बाद विवरण भरने में कई कॉलेजों ने गलती किया।
ऐसे में छात्रों और कॉलेजों की ओर से दिए गए विवरण में एकरूपता न होने के कारण तीन हजार विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति रोक दी गई है। आंकड़ों पर गौर करें तो पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग में 9 और 10 में कुल 13,056 में 11,409 का छात्रवृत्ति जारी हुआ, जबकि 1647 को नहीं मिला।
11 और 12 में 13,770 में 269 और दशमोत्तर में 6579 में 271 बच्चों को शुल्क प्रतिपूर्ति नहीं मिल सकी। समाज कल्याण विभाग में सामान्य और एससी वर्ग के करीब 700 विद्यार्थियों और अल्पसंख्यक विभाग में भी करीब 200 को वजीफा से वंचित होना पड़ा।