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मानसून की बेरूखी, सूखे की आहट ने बढ़ाई चिंता

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ज्ञानपुर। मानसून की बेरूखी से कालीन नगरी पर सूखे का संकट मंडराने लगा है। अषाढ़ खत्म होने को है, लेकिन खेतों और तालाबों में धूल उड़ रही है। बारिश के मौसम में भी किसान पानी के लिए तरस रहे हैं। औसत से तीन गुना कम बारिश होने से विशेषज्ञ से लेकर किसान चिंतित हो गए हैं। जून और जुलाई में अब तक 105 एमएम बारिश ही दर्ज हो सकी है। इससे खरीफ की खेती प्रभावित हो रही है। यही वजह है कि जिले भर में अब तक महज पांच फीसदी ही धान की रोपाई हो पाई है।
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जिले में करीब 70 हजार हेक्टेयर में खेती होती है। इसमें 50 से 55 हजार हेक्टेयर में रबी और खरीफ सीजन की खेती होती है। अबकी बार पर्याप्त बारिश न होने से जिला सूखे की चपेट में आता दिख रहा है। जून के अंतिम सप्ताह में मानसून आने के बाद अचानक गायब हो गया है। तीन से चार दिनों तक करीब 105 मिमी बारिश हुई। उसके बाद आसमान से बादल गायब हो गए। जिला प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार अब तक जिले में 105 मिमी बारिश हुई है, जो निर्धारित बरसात का लगभग 30 से 35 फीसदी है। मानक के अनुसार अब तक 256 मिमी. बरसात होनी चाहिए थी। मौसम के मिजाज को देखते हुए बेहतर बारिश की उम्मीद धूमिल पड़ती जा रही है। इसका असर धान की खेती पर साफ देखा जा रहा है। धान की खेती का लक्ष्य पहले 35 हजार हेक्टेयर था, लेकिन बाद में उसे बढ़ाकर 55 हजार कर दिया गया। अभी केवल ऐसे ही किसान रोपाई कर पाए हैं, जिनके खेत नहरों के आसपास हैं या सिंचाई के निजी साधन हैं। यदि जल्द बारिश न हुई तो धान की उपज प्रभावित होगी। उड़द, मूंग, बाजरा, मक्का और ज्वार की खेती पर भी असर पड़ेगा। बरसात के मौसम में खेतों में जमीनें सूखकर दरारें पड़ने लगीं हैं। यह देखकर किसानों की चिंता बढ़ गई है। धान की नर्सरी भी सूखने लगी है। हालांकि किसानों को अब भी उम्मीद है कि बहुत जल्द बारिश होगी और हालात सुधर जाएंगे।
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