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खूद का खेत फिर भी खरीदकर खाते हैं गेहूं, पशुओं को भी दिक्कत

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जल जमाव की समस्या इतनी बड़ी है कि कालीन नगरी के कई किसान खूद का खेत होने के बावजूद खरीदकर गेहूं खाते हैं। आठ से दस बीघा खेत है फिर भी पशुओं के लिए भूसा खरीदना पड़ता है। क्योंकि उनके खेत में करीब 10 महीने तक पानी भरा रहता है और गेहूं की खेती हो ही नहीं पाती। धान की खेती किसी तरह से करते तो जरूर हैं, लेकिन उपज न के बराबर ही होती है। यानी कुल मिलाकर आर्थिक क्षति काफी ज्यादा उठानी पड़ती है।
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हरिकरनपुर गांव निवासी सालिगराम यादव बताते हैं कि उनके पास करीब आठ बीघा खेत है, लेकिन इस बार गेहूं का उत्पादन महज तीन क्विंटल हुआ। इस तरह से एक साल भी नहीं चलेगा। भूसा भी नहीं हुआ। बताया कि उनके खेत में पानी जमा होने से दिक्कत है। यहीं हाल क्षेत्र के अन्य किसानों का भी है। कहते हैं कि प्रशासन चाहे तो मामले का निस्तारण करा सकता है। किसान मंडलायुक्त, सांसद, जिलाधिकारी से लेकर अन्य अधिकारियों तक चक्कर लगाया है। अब तो ग्रामीण ही उपाय भी बता रहे हैं कि किस तरह से काम किया जाए तो जल निकासी का इंतजाम होगा।
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