जिले की तीनों विधानसभा क्षेत्रों में इस बार सपा का मत प्रतिशत तो जरूर बढ़ा, लेकिन जीत केवल दो ही विधानसभा क्षेत्र में मिली। वहीं बसपा का मत प्रतिशत तीनों विधानसभा क्षेत्रों में पिछली बार से कम हुआ है। कांग्रेस तो हासिए पर आ गई है। यहां दो फीसदी से भी कम मत मिले हैं। वहीं भाजपा भदोही क्षेत्र में पिछली बार से ज्यादा मत पाई, इसके बावजूद हार गई।
वर्ष 2017 में कुल पड़े मतों और इस बार के कुल वोट के प्रतिशत पर गौर करें तो ज्ञानपुर विधानसभा क्षेत्र में पिछली बार निषाद पार्टी अकेले लड़ी थी, तब करीब 31 फीसदी मत मिला था। इस बार निषाद पार्टी और भाजपा ने मिलकर लड़ाई लड़ी, तब 34 फीसदी मत मिले हैं। उस बार भाजपा को 22.12 फीसदी मत मिले थे। वहीं सपा प्रत्याशी को 2017 में 18.77 फीसदी मत मिले थे, लेकिन इस बार 31.22 फीसदी वोट मिले हैं। बसपा के प्राप्त मत का प्रतिशत 21.22 फीसदी से कम होकर 14.22 फीसदी पर आ गया है। यही स्थिति भदोही विधानसभा क्षेत्र की है। यहां से पिछली बार यानी 2017 में भाजपा 33.20 फीसदी मत पाकर ही जीत गई थी, लेकिन इस बार 38.29 फीसदी मत पाने के बाद भी हार गई। सपा पिछली बार 32.74 फीसदी मत पाई थी और इस बार 40 फीसदी से ज्यादा वोट पाकर जीती है। बसपा को यहां से पहले 23.61 फीसदी और इस बार 11.28 फीसदी ही मत मिले। औराई विधानसभा क्षेत्र में भी भाजपा और सपा के मत प्रतिशत बढ़े हैं। सपा को 2017 में 30.84 फीसदी मत मिले थे तो इस बार 32.74 फीसदी मत मिले हैं। इसी तरह भाजपा को पहले 40.44 फीसदी मत प्राप्त हुए थे। इस बार मामूली ज्यादा मिला है। दीनानाथ भाष्कर को 41.69 फीसदी मत प्राप्त हुए हैं। वहीं बसपा यहां भी हासिए पर आ गई। पहले के चुनाव में जहां 23.81 फीसदी मत मिले थे तो इस बार 12 फीसदी से ही संतोष करना पड़ा है। कांग्रेस को औराई में एक फीसदी से कुछ ज्यादा मिले हैं, जबकि ज्ञानपुर और भदोही में तो एक फीसदी से भी कम वोट प्राप्त हुए।