फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

छह हजार कुपोषित, एनआरसी के बेड खाली

विज्ञापन
विज्ञापन
जिले में छह हजार से अधिक अति कुपोषित बच्चे होने के बाद भी पोषण पुनर्वास केंद्र के सभी बेड खाली हैं। अति कुपोषित बच्चों को यहां शरण नहीं मिल पा रही है। परिणामस्वरूप कुपोषण को हराने का अभियान सुस्त पड़ता जा रहा है।
विज्ञापन

सही खान-पान और पोषण न मिलने से बीमार पड़ने वाले बच्चों को सुपोषित करने पर सरकार का विशेष जोर है। कोरोना संक्रमण के मद्देनजर भी छोटे बच्चों में पोषण स्तर बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है। अति कुपोषित बच्चों के लिए जिला अस्पताल परिसर में पोषण पुनर्वास केंद्र स्थापित है। इसमें पांच वर्ष से कम आयु तक के उन बच्चों को विशेषज्ञों की निगरानी में रखने की व्यवस्था है, जो अति कुपोषित हैं। नियमों पर गौर करें तो केंद्र में लगे दस बेड पर नियमित बच्चे होने चाहिए। प्रत्येक बच्चे को 14 दिन रखकर निगरानी करने और खान-पान की भरपूर खुराक देने का भी प्रावधान है। इससे इतर जिले में हालात बदतर हैं। साल के 12 महीनों में से पांच माह को छोड़ दिया जाए तो केंद्र में सभी बेड खाली रह जा रहे हैं। जो बच्चे भर्ती भी होते हैं, वे केंद्र की दशा देख जल्द से जल्द घर जाने की कोशिश करते हैं। इस बीच 22 फरवरी के बाद सभी बेड खाली हो चुके हैं। एनआरसी केंद्र के जिम्मेदार लोगों को मुताबिक परियोजना में तैनात कर्मियों की उदासीनता से बच्चे उपचार के लिए केंद्र पर नहीं पहुंच पाते हैं। पोषण पुनर्वास केंद्र के जिम्मेदारों के अनुसार अप्रैल 2021 में नौ, मई में 24, जून में चार, जुलाई में 15, अगस्त में 13, सितंबर में आठ, अक्तूबर में आठ, नवंबर में 18, दिसंबर में 27, जनवरी में नौ और फरवरी में अब तक सात बच्चे भर्ती हो चुके हैं। यहां पर एक विशेषज्ञ डॉक्टर, चार स्टाफ नर्स सहित कुल नौ कर्मचारी तैनात हैं, लेकिन मौके पर गिने-चुने ही दिखते हैं। इससे व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2022 में 11,007 कुपोषित और अति कुपोषित 6,125 बच्चे हैं। योजनाओं पर करोड़ों खर्च के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हो पा रहा है। प्रभारी डीपीओ मंजू वर्मा का कहना है कि अति गंभीर बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया जाता है। एक साल में 142 बच्चे भर्ती हुए। उन बच्चों को 14 दिन उपचार के बाद वजन बढ़ने पर उन्हें घर भेजा जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें