16वीं शताब्दी का ये शिवमंदिर है अद्भुत, यहां नागा साधु एक महीने तक करते हैं साधना
- फोटो : अमर उजाला
मंदिर का सुरम्य वातावरण करता है आकर्षित
मंदिर का सुरम्य वातावरण न सिर्फ आम लोगों को बल्कि साधु-संतों को भी आकर्षित करता है। इस मंदिर की एक और खासियत है। मंदिर के चारों तरफ हनुमान जी मूर्ति विराजमान है। मंदिर के ठीक सामने एक प्राचीन तालाब है। जिसमें कमल पुष्प सुशोभित होते हैं। इसके अलावा चारों तरफ घने पेड़ों का परिक्षेत्र है। यह साधकों को भी आकर्षित करती है। लगभग 60 वर्ष पूर्व मोरंग के राजा, जो राजा बाबा के नाम से प्रसिद्ध हुए। इस स्थान को अपनी तपस्थली बनाई। इसी तरह मौनी स्वामी ने भी यहीं पर पीपल के वृक्ष के नीचे साधना की। पीपल का वृक्ष आज भी है। जनवरी-फरवरी में महाकुंभ के समय नागा साधु एक महीने तक मंदिर पर प्रवास कर साधना करते हैं। मंदिर सचिव रामकृष्ण खटटू ने बताया कि सावन मास में यहां पर निरंतर भंडारा चलता है। वर्तमान में पर्यटन विभाग की तरफ से प्रांगण में शौचालय, पाथवे, घाट, 70 मीटर की दीवाल, 10 सोलर लाइट, लैंड स्केपिंग, शौचालय आदि का कार्य कराया गया है।