शासनस्तर से नौनिहालों के भरण पोषण और शिक्षा के लिए तमाम योजनाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन जिम्मेदार ही इसके प्रति उदासीन बने हुए हैं। हद तो यह कि मनरेगा के तहत कराए जा रहे कार्य में ही बाल श्रम अधिनियम की अनदेखी की जा रही है। औराई ब्लॉक के एक गांव में मनरेगा के तहत हो रहे काम में 12 से 15 साल के बच्चों से काम लिया जा रहा है।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत जॉब कॉर्डधारकों को 100 दिन का काम गांव में ही दिया जाता है। इसके तहत 18 साल से अधिक उम्र के लोगों को रोजगार दिया जाता है। उधर, ग्राम प्रधानों की मनमानी और विभागीय उदासीनता के कारण बच्चों से भी काम लिया जा रहा है। औराई ब्लाक के एक गांव मनरेगा के तहत खेत से मिट्टी निकाल कर नई सड़क पर मिट्टी डाल रहे मजदूरों के साथ नाबालिग बच्चे भी फावड़ा चलाते व मिट्टी फेंकते दिखाई दे जाएंगे। बच्चों से कार्य कराया जाना लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। उधर, बाल कल्याण समिति ने बच्चों से काम कराए जाने के वीडियो और फोटो को संज्ञान में लिया है। समिति के अध्यक्ष पीसी उपाध्याय का कहना है कि बच्चों से काम लेना नियम विरुद्ध है। इस मामले में प्रधान संग अन्य अधिकारियों को नोटिस भेजकर जवाब मांगा जाएगा। श्रम प्रवर्तन अधिकारी प्रतिमा मौर्य का कहना है कि मनरेगा में बच्चों से काम कराना गलत है। इस मामले की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।