ज्ञानपुर। वाराणसी-प्रयागराज राजमार्ग पर एनएचएआई की जमीन में सजीं चाय-नाश्ते की अस्थायी दुकानें रोडवेज बसों का अड्डा बन गईं हैं। इन दुकानों पर बसों के खड़े होने के कारण बैरिकेडिंग और नाला पार कर यात्रियों को दुकान तक जाना पड़ता है। इससे दुर्घटनाओं की आशंका तो बनी ही रहती है, अक्सर जाम भी लग जाता है। मुफ्त नाश्ते की लालच में चालक और कंडक्टर इन दुकानों पर रोडवेज बसों को रुकवा देते हैं, जबकि हाईवे के कई प्रमुख कस्बों तक में रोडवेज बसों का स्टॉपेज नहीं है।
खास बात यह है कि दिन-रात व्यस्त रहने वाले रूट के स्थायी बस स्टैंड पर जहां बमुश्किल एक से दो मिनट बसें ठहरती हैं, वहीं मनचाही नाश्ते की दुकानों पर 20 मिनट से लेकर आधे घंटे तक स्टॉपेज हो जाता है। वाराणसी-प्रयागराज रेल रूट पर क्षेत्रीय परिवहन निगम की लगभग 100, उतनी ही ग्रामीण डिपो की छोटी बसें अनुबंध पर संचालित होती हैं। विभाग को राजस्व तो उपलब्ध कराया जा रहा है, लेकिन जिम्मेदारों को यह नहीं पता होता कि उनके स्थायी स्टैंड पर बसें रुकती हैं या नहीं। जहां रुक रही हैं, वहां किसकी अनुमति पर। वाराणसी से प्रयागराज, कानपुर, लखनऊ, कौशांबी, रायबरेली, झूंसी, सैदाबाद तो प्रयागराज की ओर से चंदौली, गोपीगंज नगर, जंगीगंज, हंडिया, बरौत, औराई, गोरखपुर, बलिया, देवरिया, मऊ, आजमगढ़ की यात्रा करने वाले मयपरिवार यात्री कीमती सामानों के साथ ही यात्रा करते हैं, जिनकी सुरक्षा की चिंता जिम्मेदारों को नहीं रहती। जबकि पूर्व के दिनों में लूट, छिनैती की घटनाएं विभाग की नींद हराम कर चुकी हैं। बावजूद इसके चालक और परिचालकों पर विभागीय शिकंजा नहीं कस पाने से वह बसों को अपनी मर्जी पर ही चलाते और रोकते हैं। बीच रास्ते में बसों की आकस्मिक जांच के लिए तैनात निरीक्षक भी इसे गंभीरता से नहीं लेते। एआरएम वाराणसी ओपी चौबे ने इस पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि अगर ऐसा है तो मामला गंभीर है। वह स्वयं टीम के साथ स्थलीय निरीक्षण करेंगे।